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फर्जी पासपोर्ट बनाने को लेकर ऐसे भेद खुल रहे अफगानी युवकों के, मददगार तो और निकला ऐसा शातिर

Mon, 03 Feb 2020 03:34 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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वाराणसी में फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में पकडा गया अफगानी युवक और आजमगढ निवासी उसके दोस्त के बारे में जानकारी देते नगर पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
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आजमगढ़ जिले के फूलपुर थाने के चमराडीह गांव निवासी साहबे आलम दोनों अफगानी युवकों से पासपोर्ट बनवाने के लिए 20-20 हजार रुपये में सौदा तय किया था। अफगानी युवक करमतुल्लाह का पासपोर्ट लगभग तीन माह पहले मो. ताहिर के नाम से बनवाने में वह सफल रहा। वहीं, दूसरे अफगानी युवक आबिद अब्दुल्ला उर्फ इबादत का पासपोर्ट मो. जावेद के नाम से बनवाने के दौरान भेद खुल गया और तीनों पकड़े गए।
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एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने रविवार को बताया कि साहबे आलम के अनुसार वह 2013 में दो साल के वर्किंग वीजा पर वेल्डिंग के काम के लिए कुवैत गया। तय हुआ था कि महीने में दो सौ दीनार मिलेंगे। कुवैत जाने पर पता लगा कि वेल्डिंग का काम नहीं बल्कि बकरी चराना है और मात्र 55 दीनार महीने में मिलेंगे। इस पर वह काम छोड़ कर भाग निकला।

दूसरा अफगानी युवक

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इसी दौरान उसकी मुलाकात अफगानी नागरिक अली से हुई। अली के पास रह कर उसने वगैर वीजा के ही 2018 तक वेल्डिंग का काम किया। अली ने उससे कहा कि अफगानिस्तान के बहुत से लोग कुवैत में काम करना चाहते हैं लेकिन इसके लिए उनको भारतीय पासपोर्ट की जरूरत है। वह अफगानी युवकों के फर्जी पासपोर्ट बनवाकर कम समय में अच्छा पैसा कमा सकता है।

साहबे आलम ने बताया कि उस पर कर्ज बहुत ज्यादा था। उसे लगा कि इस काम में बैठे बैठाए अच्छे पैसे मिल जाएंगे तो वह आसानी से अपना कर्ज चुका देगा। इसी वजह से वह अली से दोबारा संपर्क कर उसे अफगानी युवकों को भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए भारत भेजने को कहा।

ऐसे बनवाते थे वोटर आईडी और आधार कार्ड
साहबे आलम ने बताया कि वह देखता था कि गांव और आसपास के ऐसे कौन गरीब मुसलमान हैं, जिन्हें उनके सरकारी दस्तावेज से कोई खास सरोकार नहीं है। इसके बाद उसका नाम, उसके पिता का नाम और मकान नंबर सहित अन्य विवरण लेकर निर्वाचन संबंधी काम करने वाले सरकारी कर्मियों से संपर्क करता था। उन्हें लगभग पांच सौ रुपये देकर वह कहता था कि मतदाता परिचय पत्र का विवरण और फोटो सुधरवानी है।

इसके बाद वास्तविक नाम और पते पर अफगानी युवकों का फोटोयुक्त मतदाता परिचय पत्र बनवा देता था। इसके बाद उसी मतदाता परिचय पत्र के सहारे अफगानी युवकों का आधार कार्ड बनवा देता था। आधार कार्ड बनवाने के बाद पासपोर्ट के लिए आवेदन कराता था। पासपोर्ट बनवाने के दौरान पुलिस को पहले से ही दो से ढाई हजार रुपये दे देता था तो वेरिफिकेशन का काम आसानी से हो जाता था।

मेडिकल वीजा पर भारत आया था आबिद
अफगानिस्तान निवासी आबिद ने बताया कि वह मेडिकल वीजा पर भारत आया था। कुवैत में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इराक और सीरिया जैसे देशों के नागरिकों को वीजा और काम नहीं मिलता है। बीती 11 जनवरी को दिल्ली आने के बाद वह घूमा और 17 जनवरी को आजमगढ़ पहुंचा। शुक्रवार को साहबे आलम भी उसके साथ पासपोर्ट कार्यालय में था, जब वह पकड़ा गया तो साहबे आलम भाग निकला।

एसपी सिटी ने बताया कि आबिद और साहबे आलम को इंस्पेक्टर भेलूपुर राजीव रंजन उपाध्याय के नेतृत्व में एसआई मुकेश तिवारी, एसआई प्रकाश सिंह, एसआई राहुल यादव और कांस्टेबल राजन पांडेय व विनीत सिंह की टीम ने गिरफ्तार किया। आबिद के पास एक मोबाइल, मोहम्मद जावेद के नाम का फर्जी वोटर आईडी व आधार कार्ड और अफगानिस्तान का पासपोर्ट बरामद हुआ। वहीं, साहबे आलम के पास से एक मोबाइल, पैन कार्ड और छह आधार कार्ड बरामद हुए।

एक दरोगा और दो सिपाही निलंबित, इंस्पेक्टर एलआईयू की जांच
अफगानी नागरिक करमतुल्लाह खुद को मो. ताहिर के नाम से आजमगढ़ निवासी बताते हुए फर्जी दस्तावेजों की मदद से पासपोर्ट बनवा लिया। वहीं, आबिद अफगानिस्तान से आकर आजमगढ़ में रह रहा था और पासपोर्ट बनवाने की फिराक में था। आजमगढ़ की स्थानीय अभिसूचना इकाई, एलआईयू इंस्पेक्टर और फूलपुर थाने की पुलिस इससे बेखबर रही।

प्रकरण को लेकर एसपी आजमगढ़ त्रिवेणी सिंह ने दरोगा दिनेश पाठक और कांस्टेबल सुमंत कुमार व राहुल कुमार सिंह को रविवार को निलंबित कर दिया। उधर, आजमगढ़ रेंज के डीआईजी सुभाष चंद्र दूबे ने भी खासी नाराजगी जताई है। डीआईजी रेंज ने बताया कि प्रकरण की जांच एडिशनल एसपी को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आजमगढ़ के इंस्पेक्टर एलआईयू और अन्य जो भी पुलिसकर्मी दोषी मिलेंगे, वह विभागीय कार्रवाई की जद में आएंगे।
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वोटर आईडी और आधार कार्ड बनवाने वालों से होगी पूछताछ
दोनों अफगानी युवकों का मतदाता परिचय पत्र और आधार कार्ड बनाने वालों से सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ करेंगी। पता लगाया जाएगा कि इस तरह से हाल के दिनों में कितने लोगों का मतदाता परिचय पत्र और आधार कार्ड बना है। जांच के बाद संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रदेश सरकार को सुरक्षा एजेंसियां रिपोर्ट भेजेंगी।
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