नगर निगम में मंगलवार को संभव के तहत जनसुनवाई के दौरान नगर आयुक्त के बीच कहासुनी हुई। बनारस बार के पूर्व महामंत्री अधिवक्ता नित्यानंद राय और बनारस बार के सदस्य मिलिंद श्रीवास्तव का आरोप है कि नगर आयुक्त ने उन्हें चैंबर से बाहर निकलने और सुरक्षा कर्मियों से हिरासत में लेने को कहा। वहीं, वहीं नगर आयुक्त का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ।
अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि रविवार को वह नगर निगम की जनसुनवाई में गए थे। नगर आयुक्त को बताया कि आपके यहां अफसर सरकारी जमीन और मंदिर की जमीन को दूसरों के नाम कर रहे हैं और आपकी तरफ से उसका दाखिल खारिज भी हो रहा है। न ही स्वामित्व के कागज देखे जा रहे हैं और न ही खतौनी ही देखी जा रही है। दो साल पहले दशाश्वमेध जोन के तात्कालिक जोनल अधिकारी ने जानबूझकर राधाकृष्णजी, महादेवजी मंदिर की जमीन का नाम काटकर जावेद, आयशा खातून, जमाल अख्तर का नाम दर्ज कर दिया।
अधिवक्ता ने मांग की कि जोनल अधिकारी के खिलाफ जांच की जाए। अधिवक्ता का आरोप है कि नगर आयुक्त ने कहा कि मामला दो साल पुराना है। इस पर अधिवक्ता ने हाईकोर्ट जाने की बात कही तो नगर आयुक्त नाराज हो गए और उन्हें चैंबर से बाहर जाने को कहा। इस पर उन्होंने कार्यालय में ही धरना देने की बात कही तो उन्होंने सुरक्षा कर्मियों से हिरासत में लेने की बात कही तो कुछ पार्षदों ने बीचबचाव कराया।