लगभग 38 लाख आबादी वाले वाराणसी में दूध की खपत रोजाना आठ लाख लीटर की है। जबकि करीब दो से ढाई लाख लीटर ही दूध का उत्पादन होता है। खपत के अनुपात में उत्पादन इतना नहीं है कि हर किसी को शुद्ध दूध उपलब्ध हो सके। इसके कारण मिलावटी दूध का कारोबार भी पैर फैला रहा है। एक लीटर से ढाई लीटर बनाने का खेल धड़ल्ले से जारी है। छोटी-बड़ी करीब एक दर्जन दूध डेयरियों व मंडियों में दूध की मिलावट जोरों पर है।
दूध की कमी को दूर करने के लिए डा. वर्गीस कुरियन के जन्मदिन पर 26 नवंबर को राष्ट्रीय दूध दिवस मनाया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो दूध में पानी की मिलावट से अलग अब मुनाफे के खेल में सिंधेटिक से दूध तैयार करने का गोरखधंधा पांव पसारने लगा है। शहर की आठ प्रमख दूध मंडियों में रोजाना हजारों लीटर दूध की रोजाना खपत हो रही है। उत्पादन और खपत के मामले में बड़ी कंपिनयों ने लाखों लीटर उत्पादन कर अपनी जगह बना ली है। मगर, शुद्ध दूध को लेकर हर घर में संशय बरकरार रहता है।
यहां बता दें कि 19 मई 2019 को रोहनिया थाना के जगतपुर में मिलावटी दूध फैक्ट्री का भंडाफोड़ भी हो चुका है। काशी संजोग के नाम से बिक रहे दूध में डिटर्जेट पाउडर मिलाकर बाजार में पैकेट का दूध बेचा जा रहा था। एडीएम सिटी के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा की टीम ने छापेमारी कर फैक्ट्री में रखे 10 हजार लीटर दूध को नष्ट कराया। डेयरी का लाइसेंस निरस्त करने के लिए खाद्य आयुक्त को रिपोर्ट भी भेजी गई थी। उस दौरान मामला खुला था कि एक टैंकर भिंड मुरैना से दूध लेकर बनारस आया है जबकि अक्सर बनारस से पश्चिम की तरफ दूध जाता है।
आठ मंडियों से निकलता है 50 हजार लीटर दूध
रामनगर दूध मंडी, लंका दूध मंडी, गोदौलिया दूध मंडी, विशेश्वरगंज, पांडेयपुर, पंचकोशी, डीएलडब्ल्यू सहित इंग्लिशिया लाइन दूध मंडियों से रोजाना 40 हजार लीटर दूध की खपत मानी गई है। लगन सीजन में लीटर का आंकड़ा 40 हजार से पहुंचकर 50 हजार तक भी पहुंच जाता है।
ऐसे करें शुद्ध दूध की पहचान
- थोड़ा सा दूध लें और उतना ही पानी भी लें, दूध और पानी दोनों को मिला लें। अब इसे हिला कर देखें। अगर दूध में डिटर्जेेंट मिला हुआ है तो झाग नजर आएगा
- सिंथेटिक दूध को हथेलियों के बीच रगड़ें। यदि यह साबुन जैसा लगे तो यह सिंथेटिक दूध हो सकता है। इसके अलावा सिंथेटिक दूध गर्म करने पर हल्का पीला हो जाता है।
- कई लोग दूध में स्टार्च मिलाकर भी बेचते हैं। स्टार्च की मिलावट के लिए दूध की कुछ बूदें आयोडीन टिंचर या आयोडीन सॉल्यूशन की डालें, यदि दूध का रंग नीला हो जाए तो इसका मतलब दूध मिलावटी है।
मिलावटी दूध पीने से बच्चों के ब्रेन पर असर पड़ता है, साथ ही बच्चों के विकास को रोक देता है। मिलावटी दूध पीने से युवाओं की किडनी भी प्रभावित होती है।
डॉ. वीके श्रीवास्तव, बाल रोग विशेषज्ञ, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा
क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय दूध दिवस
श्वेत क्रांति के पिता कहे जाने वाले डॉ वर्गीस कुरियन के 94वें जन्म दिवस पर देश भर में राष्ट्रीय दूध दिवस मनाया गया। पहला राष्ट्रीय दूध दिवस 26 नवम्बर 2014 को मनाया गया था। जिसमें 22 राज्यों के विभिन्न दुग्ध उत्पादकों ने भाग लिया था। इसके जनक गुजरात के डॉ वर्गीस कुरियन को मिल्कमैन आफ इंडिया के नाम से जाना जाता है। उन्होंने देश को दूध की कमी से उबारते हुए विश्व का सबसे अधिक दुग्ध उत्पादक बनाया। 9 सितंबर 2012 को 90 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ था।