विकास प्राधिकरण ने नगवां व भेलूपुर के जोनल अधिकारियों को नदी के किनारे व ग्रीन बेल्ट में बने भवनों का सर्वे करने का निर्देश दिया है। सर्वे के दौरान नदी को प्रभावित करने वाले कुछ भवनों को चिह्नित भी किया गया है।
नदी के सर्वे, भवनों व जमीन की पैमाइश के लिए डीएम ने जो कमेटी बनाई है, उसमें अतिरिक्त उप जिलाधिकारी, उप प्रभागीय वनाधिकारी, तहसीलदार सदर, तहसीलदार राजातालाब, जोनल अधिकारी नगर निगम भेलूपुर व जोनल अधिकारी वीडीए नगवां व भेलूपुर शामिल हैं। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नदी के दोनों मुहानों से अतिक्रमण हटाकर नदी को पुनर्जीवित किया जाएगा।
दो जोन में दो सौ भवन चिह्नित
वीडीए ने भवनों के सर्वे के लिए दो जोनल अधिकारियों की तैनाती कर दी है। वीडीए वीसी राहुल पांडेय रोजाना इसकी प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने संयुक्त सचिव व नगवां जोनल अधिकारी परमानंद यादव के अलावा भेलूपुर जोनल अधिकारी वीपी मिश्रा को सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी है। अब तक इन दोनों ने करीब सौ-सौ भवनों को चिह्नित भी किया है।
हरित पट्टी पर लगाया जाएगा निशान
असि नदी के दोनों ओर 25-25 मीटर की हरित पट्टी वीडीए के 2031 की महायोजना में दर्शाई गई है। वहीं, राजस्व विभाग के रिकार्ड में यह नदी नाले के रूप में भले ही दर्ज हैं, लेकिन काफी चौड़ी दर्शाई गई है। जबकि मौके पर इसका वह स्वरूप नहीं दिखता है जो राजस्व नक्शे में है। असि नदी का उद्गम स्थल कंदवा तालाब है। यह नदी कंदवा तालाब से निकलकर कर्माजीतपुर, सुंदरपुर, कौशलेशनगर, रोहितनगर, साकेतनगर, संकटमोचन, नगवां होते हुए संत रविदास पार्क के पास गंगा नदी में मिलती है।
असि नदी को पुनर्जीवित करने के लिए चार विभागों की संयुक्त टीम बनाई गई है। टीम की सर्वे रिपोर्ट के बाद आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी। हमारा प्रयास है कि पौराणिक महत्व वाली इस नदी को पुनर्जीवित किया जाए। - कौशल राज शर्मा, जिलाधिकारी