जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बिना भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) में पंजीकरण कराए गैर-बैंकिंग वित्तीय गतिविधियां संचालित कीं, जो आरबीआई अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। कंपनी ने वाराणसी समेत पूर्वांचल के कई जिलों के अलावा उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में एजेंट और लीडर नियुक्त कर अपनी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया।
निवेशकों को बॉन्ड के माध्यम से जोड़कर उनसे धन जमा कराया गया और पांच साल में रकम दोगुनी करने का लालच दिया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इस योजना में निवेश किया, लेकिन अवधि पूरी होने के बाद भी उन्हें उनका पैसा वापस नहीं मिला। इतना ही नहीं, कंपनी की ओर से दिए गए कई चेक भी बैंकों में बाउंस हो गए।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस पूरे मामले में निवेशकों से कुल 3 करोड़ 61 लाख 42 हजार 5 रुपये की ठगी की गई है। मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी और आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।