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बस से उतरकर स्कूल जा रहा था पांचवी का छात्र तभी दूसरी बस ने मारी टक्कर, हालत गंभीर

Mon, 08 May 2017 08:55 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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अस्पताल में भर्ती छात्र - फोटो : अमर उजाला
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डीरेका स्थित सेंट जॉस स्कूल में सोमवार की सुबह सात बजे स्कूल बस की चपेट में आकर कक्षा पांच का छात्र आदित्य तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गया।
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आननफानन में आरपीएफ के जवानों और बस के ड्राइवर के सहयोग से छात्र को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी हालत स्थिर बताई गई है। इस दौरान छात्रों और उन्हें स्कूल छोड़ने आए अभिभावकों के बीच काफी देर तक अफरातफरी का माहौल रहा। 

जंगमबाड़ी की डॉ. सुरुचि तिवारी और संजय तिवारी का बेटा आदित्य तिवारी अपने नाना केदार नगर कॉलोनी डॉ. बीडी दूबे के यहां रहकर डीरेका स्थित सेंट जांस स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ता है। सोमवार की सुबह रोजाना की भांति वह मिनी बस से स्कूल गया।
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उतरकर वह स्कूल की तरफ जाने लगा इसी दौरान भुल्लनपुर निवासी ड्राइवर जयप्रकाश बस को पीछे करने लगा। इसी बीच आदित्य का पैर बस के पिछले पहिये की चपेट में आ गया। मौके पर मौजूद लोगों के शोर मचाने पर ड्राइवर ने बस को रोका।

ड्राइवर और समीप ही मौजूद आरपीएफ के जवानों ने बाइक से तत्काल आदित्य को नजदीक के निजी अस्पताल पहुंचाया जहां उसका उपचार जारी है।घायल छात्र आदित्य को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले आरपीएफ के जवान पुरस्कृत किए जाएंगे।

आरपीएफ कमांडेंट जितेंद्र श्रीवास्तव ने यह जानकारी देते हुए बताया कि हमारे जवानों ने बिना देर किए हुए तत्परता दिखाई, यह बेहद सराहनीय कदम था।
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मेरा टेस्ट छूट जाएगा... यस आई एम ओके


बस की चपेट में आकर घायल छात्र आदित्य तिवारी पढ़ने में काफी होनहार होने के साथ ही गजब का साहसी भी है। गंभीर रूप से घायल होने के बाद जब उसे अस्पताल ले जाया जा रहा था तो उसका कहना था कि आज मेरा टेस्ट छूट जाएगा, यह सही नहीं होगा।

वहीं, अस्पताल में डॉक्टरों ने उपचार के बाद आदित्य से पूछा कि अब आप ठीक हैं तो उसने कहा ‘यस, आई एम ओके ’...। मासूम आदित्य की इस दिलेरी की चर्चा पूरे अस्पताल कर्मियों के बीच होती रही।

अधिकतर स्कूल बसों में नहीं होते खलासी
डीरेका परिसर में छात्र आदित्य के घायल होने की एक बड़ी वजह बस में खलासी का न होना था। अस्पताल पहुंचे आदित्य के पिता और मौके पर मौजूद रहे अभिभावकों का भी यही कहना था कि ज्यादातर स्कूल बस में सिर्फ ड्राइवर होते हैं, यदि खलासी होता तो बैक करते समय यह हादसा न होता।

अभिभावकों ने मांग की है कि इस संबंध में पुलिस और प्रशासन गंभीर रुख अख्तियार करें और अभियान चलाकर स्कूल बसों में हर हाल में खलासी की मौजूदगी भी सुनिश्चित कराएं।
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