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UP: 96 रिक्रूट को रास नहीं आई यूपी पुलिस की नौकरी, ट्रेनिंग के समय एक ने तोड़ दिया दम; 11 का त्यागपत्र

Tue, 25 Nov 2025 11:39 AM IST
अमन विश्वकर्मा ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

उत्तर प्रदेश पुलिसउत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती कई रिक्रूट पुलिस लाइन नहीं पहुंचे। विभिन्न कारणों ने ये लोग पुलिस की नाैकरी नहीं कर पाएंगे। इसमें शारीरिक और मानसिक चुनौतियां शामिल होती हैं।
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उत्तर प्रदेश आरक्षी पुलिस भर्ती शारीरिक दक्षता परीक्षण में दौड़ लगातीं युवतियां। - फोटो : संवाद
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Varanasi News: उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती होने के लिए हजारों युवा दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। वहीं, 96 रिक्रूट को उत्तर प्रदेश पुलिस की नौकरी रास नहीं आई। 56 रिक्रूट तो पुलिस लाइन में पहुंचे ही नहीं। मेडिकल में 29 रिक्रूट लापता तो कमिश्नरेट पुलिस लाइन में आने के बाद 11 रिक्रूट ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। जबकि प्रशिक्षण के दौरान ही एक रिक्रूट ने बीमारी से दम तोड़ दिया। 

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2023-24 में चयनित 1212 अभ्यर्थियों की पत्रावली कमिश्नरेट रिजर्व पुलिस लाइन में प्रशिक्षण के लिए पहुंची। 1212 में सिर्फ 1127 रिक्रूट ही रिजर्व पुलिस लाइन पहुंचे। अनुपस्थित 56 रिक्रूट के लिए पुलिसलाइन की ओर से पत्र भेजे गए। मगर, अभी तक कोई जवाब नहीं आया। इस बीच 27 रिक्रूट प्रशिक्षण के दौरान मेडिकल से गैर हाजिर रहे।

 प्रशिक्षण के दौरान ही 11 रिक्रूटों ने नौकरी से त्याग पत्र दे दिया। जबकि प्रशिक्षण के दौरान एक रिक्रूट की बीमारी से मौत हो गईअधिकारियों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों के लिए ट्रेनिंग के दौरान नौकरी छोड़ने की वजह से विभाग की ओर से उनके घर पर सूचना भेजी जाती है, ताकि वे फिर से ट्रेनिंग में शामिल हो। 

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चर्चित रहे मामले

बहुत से अभ्यर्थी इसलिए भी ट्रेनिंग के दौरान नौकरी छोड़ देते हैं कि क्योंकि उन्हें अन्य सरकारी या निजी विभागों में काम मिल जाता है। कई बार भर्ती प्रक्रिया में अधिक समय लगने और कुछ प्रशिक्षण के माहौल में खुद को ढाल नहीं पाते हैं। 

नौकरी छोड़ने के पीछे कुछेक अभ्यर्थी ऐसे भी थे, जो कि सुबह 5 बजे उठ नहीं पा रहे थे। प्रशिक्षण के दौरान त्यागपत्र देने वाले 11 रिक्रूट में अधिकतर की सरकारी नौकरी जैसे कि ग्राम विकास अधिकारी, लेखपाल और बैंकों में भी लगी है।

 रिटायर्ड डीएसपी ध्रुव कुमार सिंह बताते हैं कि पुलिस प्रशिक्षण आमतौर पर आसान नहीं होता है। शारीरिक और मानसिक चुनौतियां शामिल होती हैं। सुबह जल्दी उठना, लंबी दौड़ लगाना, परेड, अनुशासन में रहना। यह सब कई बार कुछ अभ्यर्थियों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। 
अधिकतर प्रशिक्षुओं की सरकारी या निजी संस्थानों में नौकरी लग जाती है या फिर वह किसी व्यवसाय से जुड़ जाते हैं। कुछ पारिवारिक संकट या दबाव में नौकरी छोड़ देते हैं। - प्रमोद कुमार, डीसीपी, रिजर्व पुलिस लाइन
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