‘ख्वाब टूटे हैं मगर हौसले जिंदा हैं, हम वो हैं जहां मुश्किलें शर्मिंदा है’ यह पंक्तियां काशी की आरती भाटिया पर सटीक बैठती हैं। आरती पूर्व माध्यमिक विद्यालय छित्तुपूर में शिक्षिका हैं और प्रधानमंत्री उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। बचपन से दिव्यांग होने के बाद भी आरती बच्चों को शिक्षित करने में अहम योगदान दे रही हैं।
बुधवार को अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत निकाली गई जन जागरूकता रैली में आरती ने कहा कि इस ऐतिहासिक रैली का हिस्सा बनकर गर्व महसूस हो रहा है। अपराजिता अभियान के तहत आयोजित रैली में उन्होंने शहर के लोगों से अपील की कि हमें नारी और पुरुष के बीच के भेद को दूर करना होगा। उनका कहना है कि अगर दोनों एक साथ कदम से कदम मिलाकर चलें तो सारी बाधाएं दूर हो सकती हैं। उन्होंने काशी में आ रहे प्रवासियों को संदेश दिया कि सभी देश मिलकर रहें, क्योंकि जहां लोग प्रेम भाव के साथ रहते हैं, वहां द्वेष के लिए जगह ही नहीं बचती है।
बेहतर अनुशासन के लिए मिली शबाशी
रैली में शामिल छात्राओं ने बेहतर अनुशासन का उदाहरण देते हुए शबाशी हासिल की। आर्य महिला इंटर कॉलेज की छात्राएं न सिर्फ रैली में अनुशासन में रहीं, बल्कि रैली खत्म होने के बाद भी वे कतारबद्ध होकर स्टेडियम के बाहर भी गईं।