फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘तीन-तीन’ के फेर से नहीं निकल पाए सियासी क्षत्रप

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदीप मिश्र
विज्ञापन

वाराणसी। प्रत्याशियों की घोषणा को लेकर दोनों प्रमुख गठबंधन के साथ-साथ कांग्रेस की ऊहापोह बरकरार है। प्रत्याशियों की घोषणा में पार्टियों को पसीना छूट रहा है। सांगठनिक तैयारियों को लेकर भले ही भाजपा आगे है लेकिन प्रत्याशियों के चयन को लेकर उसकी भी स्थिति सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस से अलग नहीं है। आजमगढ़, जौनपुर और भदोही में 16 अप्रैल से नामांकन शुरू होना है लेकिन पार्टी के रणनीतिकार दो और कांग्रेस एक सीट के प्रत्याशी को लेकर पसोपेश में हैं। आजमगढ़ को छोड़ दें तो तीनों ही प्रमुख खेमे तीन-तीन संसदीय सीटों पर प्रत्याशियों का एलान नहीं कर पाए हैं।
वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल की 12 सीटों में बाकी रह गए उम्मीदवारों को लेकर सपा में पसोपेश ज्यादा है। बलिया, चंदौली और वाराणसी में पार्टी न तो प्रत्याशी तय कर पा रही है और न ही आगे की रणनीति का संकेत मिल रहा है। सपा वाराणसी में गठबंधन के गणित को समझ रही है। इसीलिए प्रत्याशी का नाम घोषित नहीं किया जा रहा है। उधर, कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कौन हो, इस पर मंथन कर रही है। प्रियंका गांधी के साथ-साथ कांग्रेसी यहां से बतौर प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी का नाम चलाने लगे हैं।
विज्ञापन

भाजपा ने सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोबारा वाराणसी से चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा की थी। सब कुछ तय होने के बाद भी केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय को देर से उम्मीदवार घोषित किया गया। इसी तरह सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशियों में गाजीपुर से अफजाल अंसारी, घोसी से अतुल राय और मछलीशहर से टी राम का नाम फरवरी में तय हो गया था लेकिन घोषणा में दो महीने लग गए। उधर, कांग्रेस को पहले चरण में मिर्जापुर, राबर्ट्सगंज और लालगंज के अलावा उम्मीदवार ही नहीं मिल पाए।
दोनों प्रमुख गठबंधन और कांग्रेस एक-एक दलबदलू पर दांव लगा चुके हैं। भाजपा ने मछलीशहर से 2014 में बसपा की टिकट पर 266055 वोट पाने वाले बीपी सरोज को रामचरित्र निषाद की जगह उम्मीदवार बना दिया। 2004 से सपा सांसद चुने गए अफजाल अंसारी अब बसपा से मैदान में हैं। कांग्रेस ने घोसी से 1999 में बसपा सांसद रहे बाल कृष्ण चौहान को पार्टी से निष्कासन के बाद उम्मीदवार बनाया है।
--------
अब तक घोषित उम्मीदवार
लोकसभा क्षेत्र भाजपा गठबंधन सपा-बसपा गठबंधन कांग्रेस
आजमगढ़ दिनेश लाल यादव निरहुआ अखिलेश यादव -
बलिया वीरेंद्र सिंह मस्त - -
भदोही - रंगनाथ मिश्र रमाकांत यादव
चंदौली डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय - शिव कन्या कुशवाहा
गाजीपुर मनोज सिन्हा अफजाल अंसारी अजीत प्रताप कुशवाहा
जौनपुर - श्याम सिंह यादव देवव्रत मिश्र
लालगंज नीलम सोनकर संगीता पंकज मोहन सोनकर
घोसी - अतुल राय बाल कृष्ण चौहान
मछलीशहर बीपी सरोज टी राम -
मिर्जापुर अनुप्रिया पटेल राजेश एस बिंद ललितेश पति त्रिपाठी
राबर्ट्सगंज पकौड़ी लाल कोल भाई लाल कोल भगवती प्रसाद चौधरी
वाराणसी नरेंद्र मोदी - -
----------------
आजमगढ़ में प्रत्याशी नहीं उतारेगी कांग्रेस
आजमगढ़ सीट पर अखिलेश यादव के मुकाबले कांग्रेस प्रत्याशी नहीं उतारेगी। इसीलिए कांग्रेस ने पूर्व सांसद रमाकांत यादव को भदोही से उम्मीदवार बनाया है। आजमगढ़ में अखिलेश को चुनौती देने के लिए रमाकांत से बेहतर प्रत्याशी नहीं हो सकता था लेकिन कांग्रेस चुनाव से पहले ऐसा माहौल बनाना चाहती है, जिससे लगे कि वह भाजपा को रोकने के लिए विपक्ष के साथ है। हालांकि बदले में कांग्रेस चाहती है कि वाराणसी सीट पर सपा-बसपा गठबंधन कांग्रेस की मदद करे और सपा प्रत्याशी न उतारे। अमेठी और रायबरेली में गठबंधन ऐसा कर चुका है।
विज्ञापन

मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं ओमप्रकाश
घोसी सीट के लिए सुभासपा और भाजपा के बीच बातचीत चल रही है। दरअसल, कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर हार-जीत की परवाह न करते हुए चुनाव के लिए एक संसदीय सीट चाहते हैं। कारण, वह अपनी बिरादरी और समर्थकों को बताना चाहते हैं कि दो सीटें पाने वाले अपना दल (एस) के मुकाबले हैसियत के हिसाब से एक ही सीट मिलनी थी। सीट जीतने पर वह केंद्र में भी हिस्सेदारी मांग सकते हैं। कहा जा रहा है कि सुभासपा की जिद और निषाद पार्टी से समझौते के कारण ही घोसी के साथ-साथ जौनपुर और भदोही सीट पर फैसला अटका हुआ है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें