वाराणसी। शहीद विशाल का पार्थिव शरीर गुरुवार रात करीब साढ़े दस बजे घर से पद्म विभूषण गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल लाया गया तो श्रद्धांजलि देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। भीड़ बढ़ने पर पुलिस को पुलिस लाइन चौराहा से हुकुलगंज तिराहा के बीच वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी।
इस दौरान भारत माता की जय और शहीद विशाल अमर रहें का उद्घोष होता रहा। बाद में तिरंगा लेकर लोगों का हुजूम पार्थिव शरीर के साथ हरिश्चंद्र घाट रवाना हुआ। रास्ते में सड़क के दोनों तरफ खड़े लोग शहीद की जय-जयकार करते रहे।
इससे पहले स्थानीय लोगों ने मांग की कि सांस्कृतिक संकुल का नाम शहीद विशाल के नाम पर हो और यहां उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए। इस पर मौजूद अफसरों ने प्रदेश सरकार को अवगत कराने का आश्वासन दिया। शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए राज्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी व अनिल राजभर, पूर्व विधायक अजय राय, सतीश चौबे, सपा नेता मनोज राय धूपचंडी, सेंट्रल बार अध्यक्ष शिवपूजन सिंह गौतम के अलावा पुलिस, प्रशासन, थल सेना और वायु सेना के कई अधिकारी पहुंचे थे।
माधवी के साथ घर पहुंचे उनके दोनों मासूम बच्चों की निगाहें अपने पापा को खोज रही थी। घर के सभी लोगों को रोते देख विशाल के दोनों बच्चे समझ नहीं पा रहे थे कि आखिरकार हुआ क्या है। दोनों मासूमों को दादी ने सीने से चिपका लिया तो माधवी को संभालने में परिवार की महिलाओं की हिम्मत जवाब दे गई। वे बार-बार कह रही थीं कि बीच मझधार में दो बच्चों के साथ छोड़ कर कहां चले गए विशाल...।