आईआईटी बीएचयू में धातुकीय अभियांत्रिकी विभाग में धातुकर्म कचरे के प्रबंधन और रिसाइकिलिंग (पुनर्चक्रण) विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। भारत में धातु कर्म इंजीनियरिंग विभाग की 100 साल की यात्रा का जश्न मनाने के लिए शताब्दी वर्ष समारोह के तहत आयोजन हो रहा है।
डंडी विश्वविद्यालय स्कॉटलैंड के प्रो. सैंड्रा विल्सन ने इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट से प्राप्त धातुओं से बने आभूषणों को प्रदर्शित किया। बताया कि धरती से अस्सी प्रतिशत स्वर्ण निकाला जा चुका है। मात्र 20 प्रतिशत ही बचा है। ऐसे में रिसाइकिलिंग से ही स्वर्ण की आपूर्ति पूरी की जा सकती है।
एडिन बर्ग विश्वविद्यालय स्कॉटलैंड के प्रो. जैसन लव ने कहा कि पुनर्चक्रण के लिए विशेषज्ञों, रसायन शास्त्रीय को मिलकर काम करने की जरूरत है। मुख्य अतिथि प्रो. रत्नेश त्यागी ने बताया कि विभाग उत्कृष्ट काम कर रहा है। गुलाबी मीनाकारी की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही।