बीएचयू में डीआरडीओ की मदद से बनकर तैयार 750 बेड वाले पंडित राजन मिश्रा अस्पताल में फिलहाल 250 बेड पर मरीजों को भर्ती करने की सुविधा सोमवार से शुरू की गई है। इसे लेवल 3 यानी कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए ही बनाया गया है। वाराणसी समेत अन्य जिलों से आईसीयू, वेंटिलेटर वाले मरीज यहां आ रहे हैं।
सोमवार से शुरु भर्ती प्रक्रिया में बृहस्पतिवार की शाम 6.30 बजे तक 165 मरीज भर्ती किए जा चुके थे। अब तक चार दिन में 40 मरीजों की मौत हो चुकी है। इन मरीजों में 15 से 20 मरीज तो वाराणसी जिले के हैं, जबकि बाकी जौनपुर, सोनभद्र, चंदौली सहित वाराणसी के आसपास के जिलों के मरीजों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से डीआरडीओ में हुई मौत की जानकारी का आंकड़ा रोजाना क्यों नहीं जारी किया जा रहा है। इस पर भी तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
डीआरडीओ के अस्पताल में मरीजों की मौत के बाद परिजनों की सहूलियत के लिए नियमानुसार डेथ सर्टिफिकेट भी गेट के पास बने हेल्पडेस्क से जारी किया जा रहा है। हेल्प डेस्क पर इसके लिए अलग से रजिस्टर भी है। रजिस्टर में भी मरीज के मौत की तारीख और समय का पूरा ब्यौरा भी भरा जा रहा है।
इसमें भी वाराणसी समेत अन्य जिलों के रहने वाले मरीजों की मौत का पूरा रिकार्ड दर्ज है। इसमें नाम, पता, मौत की तारीख, समय, कारण लिखा है। हेल्प डेस्क की मॉनिटरिंग का काम भी स्वास्थ्य विभाग के पास ही है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों की मौत के आंकड़े जारी न करना, कहीं ना कहीं व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।