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हादसे को दावत देते नगर के 298 जर्जर भवन, अधिकतर मामलों में किराएदार और मकान मालिक का विवाद

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शहर में 298 जर्जर भवन हैं जो कभी भी हादसे के कारण बन सकते हैं। इनके आसपास से गुजरते समय लोगों के मन में भय बना रहता है कि कहीं ये गिर न जाएं। कई मकान तो दूसरे भवनों के सहारे खड़े हैं। फिर भी ऐसे मकानों में लोग रह रहे हैं। नगर निगम की ओर से सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही नोटिस देकर गिराया जाएगा।
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पुराना शहर होने के कारण संकरी गलियों में रोज हजारों लोगों का आना-जाना लगा रहता है। कई गलियों की हालत तो ऐसी है कि वहां दो बाइक एक साथ नहीं जा सकतीं हैं। गलियों में स्थित जर्जर मकानों में लोग रहते हैं, जबकि नगर निगम 100 से 150 वर्ष पुराने भवनों को जर्जर घोषित करने के साथ नोटिस भेज चुका है। नोटिस मिलने के बावजूद जर्जर भवनों में रह रहे लोग खाली नहीं कर रहे हैं। ऐसे सरकारी व निजी भवनों को लेकर सरकार ने तोड़ने का आदेश दिया है ताकि हादसे रोके जा सकें, लेकिन कानूनी पेच में नगर निगम के हाथ बंधे हैं और ऐसे भवन हादसे को दावत दे रहे हैं। मीरघाट की गली में एक जर्जर भवन का कुछ हिस्सा गिरा है।
नगर निगम के रिकार्ड में वर्तमान में पांचों जोन मिलाकर 298 जर्जर भवन हैं। इनमें सर्वाधिक जर्जर भवन दशाश्वमेध व कोतवाली जोन में है। नगर निगम के मुख्य अभियंता सूरज पाल सिंह ने बताया कि जर्जर भवनों की लिस्ट तैयार की गई है। सबसे ज्यादा जर्जर भवन पक्के महाल यानी पुरानी काशी में हैं। इन भवन स्वामियों को नोटिस दिया गया है। नगर निगम ने जिन जर्जर भवनों को नोटिस दी है उनमें अधिकांश किरायेदारी का विवाद है। मालिक व किरायेदार के बीच विवाद में कोर्ट से स्टे होने के कारण नगर निगम उनको ध्वस्त नहीं कर पाता है।
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इनसेट
जोनवार जर्जर भवनों की सूची
दशाश्वमेध जोन : 105
कोतवाली जोन : 146
आदमपुर जोन : 27
भेलूपुर जोन : 13
वरुणापार जोन : 7
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