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अप्पा जी को भूल पाना आसान नहीं

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वाराणसी। ठुमरी साम्राज्ञी पद्मविभूषण गिरिजा देवी (अप्पा जी) को भूल पाना आसान नहीं है। वह भले ही हम सबके बीच नहीं हैं लेकिन उनकी यादें हमेेशा साथ हैं। समाज सेवी और सामाजिक साहित्यिक संस्था के संरक्षक अनिल जैन का कहना है कि उनकी सादगी का हर कोई मुरीद है। संगीत के प्रति उनका जुड़ाव इतना गहरा था कि कई बार तो तबीयत खराब होने के बाद भी अप्पा जी ने बेहतरीन प्रस्तुति दी।
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गिरिजा देवी की याद में 24 मार्च को अस्सी घाट पर होने वाले आयोजन द लीजेंड्स लाइव मेगा आयोजन को लेकर अनिल जैन ने बताया कि इसके माध्यम से अप्पा जी को याद करने का मौका मिलेगा। इसके लिए गजेंद्र सिंह सहित उनकी पूरी टीम की जितनी सराहना की जाए वह कम है। संगीत के साथ-साथ शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में भी उनका भावनात्मक जुड़ाव रहा। 2004-05 की बात है जब संकल्प संस्था की ओर से आयोजित महिला प्रशिक्षण शिविर में अप्पा जी को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने गए थे। अप्पा जी ने तबीयत ठीक न होने के बाद भी सहर्ष स्वीकृति दे दी और कार्यक्रम में आकर महिलाओं का उत्साह बढ़ाया। पूज्यनीय पिताजी स्व. गुलाल चंद्र जैन को भाई मानने की वजह उनका प्यार, दुलार जो मिला वह कमी हमेशा खल रही है, जिसको कभी पूरा नहीं किया जा सकता है। कहा कि अप्पा जी जैसा न कोई हुआ न कोई होगा।
अप्पा जी रही है ठुमरी की महारानी
अप्पा जी के गाने में जो मिठास, प्यार और भाव था, वह बहुत कम ही देखने को मिलता है। अप्पा को ठुमरी की रानी कहा गया है। वह बनारस घराने की बहुत ही कमाल की शास्त्रीय गायिका रही हैं। भजन सम्राट अनूप जलोटा का कहना है कि अप्पा जी ने रागों को इतनी सुंदरता से प्रस्तुत किया है कि कोई भूल नहीं सकता है।
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अप्पा जी की याद में आयोजित कार्यक्रम के आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए अनूप जलोटा ने कहा कि गायिकी से पहले अप्पा जी की रियाज, सही बढ़त देखकर और उसे सुनकर लोग आश्चर्य चकित हो जाते थे। बनारस घराने के शास्त्रीय रागों की उन्होंने बेहतरीन प्रस्तुती की। उसमें ख्याल, टप्पा, चतुरंग, चैती, ठुमरी सब कुछ गाया। अप्पा जी को कभी भी भूला नहीं जा सकता है।
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