वाराणसी। आईआईटी बीएचयू में चल रहे चौदह दिवसीय कार्यशाला में सोमवार को वक्ताओं ने काशी की राजनीतिक चेतना पर विस्तृत चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि विजय नारायण सिंह ने कहा कि काशी भाषाई चेतना का अगुआ रही है। बनारस की राजनीति में एक संपूर्ण भारतीय सोच है, जो विलुप्त हो चुकी है। ऐसे में काशी से नई राजनीतिक चेतना की जरूरत है।
मालवीय उद्यमिता संवर्धन केंद्र में कार्यशाला के ग्यारहवें दिन काशी की राजनीतिक चेतना विषय पर विजय नारायण ने कहा कि देश की राजनीति का संचालन बड़े पूंजीपति कर रहे हैं। पूरा सिस्टम माफिया तंत्र हो चुका है। सभी पार्टियों के लिए राजनीति एक धंधा हो चुका है। दूसरे सत्र में काशी की पत्रकारिता पर बोलते हुए डॉ. दयानंद ने कहा कि काशी एकमात्र शहर है जिस पर 3000 से अधिक पुस्तकें छप चुकी हैं। भारत में पत्रकारिता की जन्मभूमि कलकत्ता रही है। काशी को हिंदी पत्रकारिता की राजधानी कहते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विकास सिंह, अध्यक्षता प्रो. एसएन उपाध्याय और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुजीत चौबे ने किया। इस दौरान डॉ. अवधेश दीक्षित, गोपेश पांडेय, बलराम यादव, उपेंद्र दीक्षित, अभिषेक यादव आदि मौजूद रहे।