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पानी को तरस रहे 10 हजार मासूम

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ज्ञानपुर। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों मासूम बच्चे पानी के लिए तरस रहे हैं। जिले के सौ से अधिक विद्यालयों में लगे हैंडपंप महीनों से खराब हैं। यही नहीं, नौ प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां अब तक हैंडपंप लगाए ही नहीं गए जबकि इसके लिए धनराशि मंजूर हो चुकी है। ऐसी अव्यवस्था के बीच इन विद्यालयों में पढ़ रहे करीब 10 हजार बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए बाहर जाना पड़ता है। अब गर्मी ने भी असर दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे पेयजल संकट और गंभीर होगा।
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जिले में गर्मी ने तल्खी दिखाना शुरू कर दिया है। वहीं, परिषदीय विद्यालयों में लगे हैंडपंप पानी देने से जवाब देने लगे हैं। इससे बच्चों को पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिले में कुल 1117 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैें। इनमें लगे 100 से अधिक हैंडपंप खराब हैं। रिबोर होने के बाद ही ये हैंडपंप ठीक होंगे। नौ विद्यालयों में अभी तक हैंडपंप लगा ही नहीं है। शिक्षा विभाग का दावा है कि उन विद्यालयों पर हैंडपंप लगाने के लिए जलनिगम की जरूरतों को पूरा कर दिया गया है। इसके बाद भी जलनिगम हैंडपंप नहीं लगवा रहा है। इससे बच्चे पेयजल के लिए परेशान हो रहे हैं। वहीं गांवों के विद्यालयों में हैंडपंपों के रिबोर का अधिकार शासन ने ग्राम प्रधानों को दे दिया है। आरोप है कि अधिकार मिलने के बाद भी प्रधान हीलाहवाली कर रहे हैं। नगरों के विद्यालयों में भी हैंडपंप खराब पड़े हैं। बच्चों को पानी पीने के लिए हाईवे पार करना पड़ रहा है। इससे कभी भी बड़ हादसा हो सकता है। गोपीगंज नगर के प्राथमिक विद्यालय पड़ाव का हैंडपंप कई महीनों से खराब है। अभिभावकों की शिकायत के बाद भी हैंडपंप को ठीक नहीं कराया जा रहा है। इसको लेकर नागरिकों ने कई बार प्रदर्शन भी किया, लेकिन बात नहींत बनी। फिरा भी नगर पालिका और जिला प्रशासन पर कोई असर नहीं हुआ। इसी तरह कई गांवों के विद्यालयों के भी हैंडपंप खराब हैं। बच्चे पेयजल के लिए परेशान हैं। इसी तरह सुरियावां क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कौड़र समेत दर्जनों परिषदीय विद्यालयों के हैंडपंप खराब पड़े हैं।
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