वाराणसी। अस्सी घाट स्थित सुबह-ए-बनारस के मंच से बुधवार को रागगीरी संस्था के कैलेंडर का विमोचन किया गया। युवाओं में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रचार प्रसार को लेकर काम कर रही संस्था के कैलेंडर का विमोचन जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने किया। इस मौके पर जिलाधिकारी ने इस प्रयास की सराहना की। सुबह-ए-बनारस के संयोजक डॉ. रत्नेश वर्मा ने कहा कि भारतीय परंपराओं और संस्कृति को हमें किसी ना किसी रूप में बचाए रखना होगा। आज एक ऐसा कैलेंडर रिलीज हो रहा है जिसमें सभी घरानों के संस्थापक कलाकारों के साथ साथ नामचीन कलाकारों को याद किया गया है। रागगीरी इससे पहले भी सुबह-ए-बनारस के सहयोग से वाराणसी में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती रही है। इस मौके पर पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर एस चूडामणि ने भी अपने विचार रखे।
इस साल कैलेंडर को शास्त्रीय गायकी के घरानों पर केंद्रित किया गया है। कैलेंडर में घराने के शुरूआती कलाकारों से लेकर उन कलाकारों को भी शामिल किया है जिन्होंने उस घराने को पहचान दिलाई। इस मौके पर रागगीरी संस्था के वाराणसी चैप्टर प्रमुख शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि हमारी संस्था विशेष तौर पर अपनी अगली पीढ़ी में शास्त्रीय संगीत के प्रचार प्रसार के लिए ‘सुनेंगे तभी तो सीखेंगे’ शीर्षक से एक सिरीज चला रहे हैं। इसके तहत पिछले तीन साल से कैलेंडर का प्रकाशन कर रहे हैं। साल 2017 के कैलैंडर में भारतीय नृत्य के दिग्गज कलाकारों पर सिरीज थी और 2016 में शास्त्रीय गायकी और वादन के महान कलाकारों पर। उन्होंने बताया कि रागगीरी के इस कैलेंडर को देश के और भी कई शहरों में रिलीज किया गया है जिससे युवाओं में महान कला के प्रति जागरूकता हो।