वाराणसी। प्रवासी भारतीय सम्मेलन के समापन समारोह में बड़ा लालपुर स्टेडियम में मुख्यमंत्री ने कहा- प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत बहुत कम समय में दुनिया भर में आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा है। भारत के विकास में प्रवासियों के लिए असीम संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन में हुई चर्चाओं और संवाद को निरंतरता प्रदान की जाएगी। प्रवासियों के अनुभव का लाभ लिया जाएगा। उन्होंने मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ को प्रवासियों का प्रेरणा स्रोत बताया और कहा- प्रयागराज की धरती प्रवासियों के स्वागत के लिए उत्सुक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के कारण समापन समारोह खास हो गया। उनके स्वाधीनता के लिए बढ़ाए आंदोलन में प्रवासियों की भूमिका अहम रही है। सीएम ने प्रयागराज कुंभ के लिए प्रवासी भारतीयों को आमंत्रित किया।
विदेश मंत्री ने किया स्वागत
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने समापन समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और अन्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रवासियों द्वारा इलाहाबाद कुंभ एवं गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने की इच्छा जताने पर प्रवासी दिवस कार्यक्रम की तिथियों में परिवर्तन किया गया। उन्होंने बताया कि प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी और हर साल 15 प्रवासी भारतीयों को सम्मानित किया जाता रहा है। 2015 से प्रवासी भारतीय दिवस प्रत्येक दूसरे वर्ष मनाया जाता है। इसीलिए सम्मानित किए जाने वालें की संख्या 30 कर दी गई है। धन्यवाद ज्ञापन विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह (से.नि.) ने किया।
ये प्रवासी किए गए सम्मानित
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रवासी भारतीय सम्मान अवार्ड आस्ट्रेलिया के निहाल सिंह, भूटान के राजेंद्र नाथ खजांची, कनाडा रमेश छोटाई, चीन के अमित वायकर, इंडियन कम्यूनिटी एसोसिएशन इन इजिप्ट, फ्रांस की मालिनी रंगनाथन, गुयाना हिन्दू धार्मिक सभा, इटली के भिताल दास माहेश्वरी, जमाएका के गुनाशेखर मुपुरी, केन्या के पीवी संबाशिव राव, केन्या के प्रकाश माधव दास हेडा, कुवैत के राजपाल त्यागी, म्यांमार के बनवारी लाल सत्यनारायण गोयनका, न्यूजीलैंड के भवदीप सिंह ढिल्लन, नार्वे के हिमांशु गुलाटी, ओमान के विनोदन वैरमवेली थाजिकुनील, पोलैंड के जगदेश्वर राव मदुकुरी, कतर के पूणेन्दु चंद तिवारी, दक्षिण अफ्रिका के अनिल शुक्ला, दक्षिण अफ्रिका के स्वामी सारदाप्रभानंद, स्विटरलैंड के राजेन्द्र कुमार जोशी, तंजानिया की शमीम परकर खान, यूएई के गिरिश पंत, यूएई के सुरेन्द्र सिंह खंडारी, यूएइ के जुलेखा दाउद, युगांडा के राजेश चापलोट, यूएएस के चंद्रशेखर मिश्र, यूएसएस के गीता गोपीनाथ, यूएसए के गिरिश जयंतीलाल देसाई और यूएई के किरन छोटीभाई पटेल को दिया।