ज्ञानपुर। गोपीगंज स्थित आदर्श कोतवाली पुलिसकर्मियों की लापरवाही से कलंकित होती रही है। किसी न किसी मामले को लेकर यह सुर्खियों में रही है। कुछ मामले में प्रभारी संग पुलिसकर्मी नपे तो कइयों पर मुकदमा भी दर्ज हुआ। अब एक बार फिर ऑटो चालक रामजी मिश्र की मौत के प्रकरण में कोतवाली को कलंकित कर दिया।
जिले के नौ थाने और कोतवाली में कुछ ऐसे हैं, जिनका चार्ज पाने के लिए प्रभारियों में रस्साकसी चलती है। राजनीतिक पकड़ और अफसरों के करीबियों को ही ऐसे थाने मिलते हैं। इसी में गोपीगंज कोतवाली भी शामिल है। हालांकि यहां अधिक दिनों तक रहने वाले प्रभारी किसी न किसी मामले में फंस कर अपनी नौकरी को दांव पर लगा चुके हैं। करीब ढाई दशक पूर्व यहां के प्रभारी रहे भृगुनाथ मिश्र चुनाव के समय गोली चलने को लेकर फंसे। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के साथ ही निलंबन की कार्रवाई हुई। तीन साल पूर्व ओमैसम प्रकरण में फिर कोतवाली कलंकित हुई। कार्रवाई के नाम पर करोड़ों का ओमैसम बेच दिया गया और मांस लाकर औराई के भवानीपुर में दफनाया गया। मामला उजागर हुआ तो तत्कालीन प्रभारी रमेश चौबे, क्राइम ब्रांच के एक सिपाही संग कई पुलिसकर्मी नप गए। उन पर भ्रष्टाचार समेत कई धाराओं में केस दर्ज हुआ। मामले की आंच एएसपी व एसपी तक पड़ी और उन्हें भी जाना पड़ा। अभी यह मामला ठंडा पड़ा नहीं था कि कोतवाली पुलिस ने मानवता को शर्मसार किया। अज्ञात मिले शव का अंतिम संस्कार करने के बजाए विसर्जन कर दिया गया। किसी तरह परिवार वाले थाने पहुंचे तो उन्हें अस्थि कलश थमाया गया। भवानीपुर के पास शव उतराया मिला तो पुलिस की पोल खुली। इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी निलंबित किए गए थे। अब एक हिरासत में रामजी मिश्र की मौत को लेकर कोतवाली सुर्खियों में है। शासन तक मामले की गूंज पहुंच चुकी है।