वाराणसी। पशु तस्करों को सेफ रूट देने के लिए पुलिस ने कोड वर्ड की एक नई भाषा गढ़ी है। प्रति माह तीन से पांच लाख रुपये लेकर पशु तस्करों को कोड वर्ड दे दिए जाते हैं और फिर एनएच-2 पर उनके वाहनों की जांच नहीं होती है। पुलिस और तस्करों की मिलीभगत से भदोही से चंदौली के बीच यह खेल जारी है। इस खेल में गाय के लिए व्हाइट गोल्ड, बैल के लिए सफेदा और भैंस के लिए डायमंड कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पशु तस्करी के इस खेल में पुलिस के ही आठ बर्खास्त सिपाही बिचौलिया बने हुए हैं। ये हाइवे के किनारे के थानों के थानेदारों और चौकी प्रभारियों से सौदेबाजी करते हैं। तीन से पांच लाख रुपये महीने या फिर प्रति वाहन पांच से दस हजार रुपये के बीच सौदा तय होता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार फोरलेन पर सामान्यतया वाहन चेकिंग न होने के कारण नई दिल्ली से कोलकाता को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग - दो पशु तस्करी के लिए सुरक्षित रूट बना हुआ है। बर्खास्त आठ सिपाहियों के प्रलोभन में आकर भदोही से चंदौली के बीच के ऊंज, गोपीगंज, औराई, मिर्जामुराद, रोहनिया, लंका, रामनगर, मुगलसराय, अलीनगर, चंदौली और सैयदराजा थाने पर वर्षों से तैनात सिपाही इस अवैध धंधे को प्रश्रय दिलाने में अहम भूमिका का निर्वहन करते हैं। सख्ती बढ़ने पर यह धंधा मंदा हो जाता है और माहौल सामान्य होते ही सब कुछ जैसे का तैसा चलने लगता है।