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धमेख स्तूप की रेलिंग में लग रही दीमक

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सारनाथ। तथागत की उपदेश स्थली में धमेख स्तूप को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से लगाई गई लाखों रुपये की लकड़ी की रेलिंग में दीमक लग रही है। जगह-जगह से रेलिंग में पोल होने के साथ लकड़ियां टूटकर गिर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इसको दुरुस्त कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
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बौद्ध मतावलंबियों द्वारा स्तूप में पीले पत्र लगाने व धूप-अगरबत्ती जलाने के कारण स्तूप का रंग काला पड़ने के साथ पत्थरों का क्षरण होना शुरू हो गया था। विभाग ने इसको गंभीरता से लेते हुए विगत तीन साल पूर्व धमेख स्तूप को काठ की मोटी रेलिंग से लगभग तीन फीट की दूरी से गोलाकार बैरिकेडिंग की थी। इस पर लाखों रुपये का खर्च आया था लेकिन विभाग की लापरवाही व रखरखाव ठीक ढंग से नहीं होने की वजह से उसमें दीमक लग रही हैं और वह जगह-जगह से टूटकर खोखला होता जा रहा है। इस बारे में अधीक्षण पुरातत्वविद नीरज सिन्हा ने बताया कि धूप व बारिश की वजह से दीमक लगने व लकड़ी टूटने की बात सामने आई है। जल्द ही रासायनिक लेपन के साथ सही करा दिया जाएगा।
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