वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने अपने तीन साल पुराने पाठ्यक्रमों में बदलाव की तैयारी की है। नया सिलेबस पूरी तरह नए दौर की जरूरतों के अनुरूप होगा। स्किल डेवलपमेंट, बदलते परिवेश की जरूरतों और रोजगार-तकनीकी सहित अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ये बदलाव किए जाएंगे। एमबीए और वाणिज्य के पाठ्यक्रमों में जीएसटी को शामिल किया जाएगा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध केंद्र की स्थापना भी जल्द होगी।
शनिवार को डॉ. पृथ्वीश नाग की अध्यक्षता में हुई विद्या परिषद की बैठक में कई अहम निर्णयों पर मंथन हुआ। दीनदयाल शोध केंद्र की स्थापना पर मुहर लगाते हुए विद्या परिषद ने इस योजना को मूर्तरूप देने के लिए दो सदस्यीय समिति बनाई। डॉ. दिवाकर लाल श्रीवास्तव और डॉ. सभाजीत यादव इस समिति में शामिल हैं। इस केंद्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर न सिर्फ शोध होगा बल्कि उन पर सेमिनार, परिचर्चा और संगोष्ठियां भी आयोजित होंगी। शासन ने इसके लिए फंड देने के सहमति भी दे दी है।
पाठ्यक्रमों में बदलाव पर चर्चा के दौरान तय हुआ कि तीन साल पुराने पाठ्यक्रमों को बदला जाएगा। नया सिलेबस आधुनिक परिवेश के अनुसार होगा। पाठ्यक्रमों में बदलाव इसी शैक्षणिक सत्र से करने की बात कही गई। बदले पाठ्यक्रमों को कुलपति अप्रूव्ड करेंगे। शिक्षकों के प्रमोशन और नियुक्ति के अंतर्गत यूजीसी की नियमावली को परिमार्जित करने के लिए प्रो. ओपी सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। बैठक में कुलसचिव ओम प्रकाश, उप कुलसचिव व्यास नारायण, डॉ. सुरेंद्र सिंह, प्रो. शंभुनाथ उपाध्याय आदि मौजूद रहे।