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यूपी के हजारों युवा निकातत कानून की चपेट में

Thu, 24 Oct 2013 02:58 AM IST
मोहसिन पाशा/बरेली
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खाड़ी के देशों में आजाद वीजा पर नौकरी करने वाले हजारों युवा सऊदी अरब सरकार के निकातत कानून की चपेट में आ गए हैं। मजबूरी में उन्हें घर लौटना पड़ रहा है। पिछले तीन महीने में 20 युवक वापस आ चुके हैं। हाजियों की वापसी के बाद वहां की सरकार इस मामले में और सख्ती करने जा रही है।
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उत्तर प्रदेश के बरेली महानगर से सटी नगर पंचायत ठिरिया निजावत खां का आर्थिक-सामाजिक ढांचा सऊदी अरब से की जाने वाली कमाई पर टिका है। यहां के हर घर से कम से कम एक युवक खाड़ी देश में है।

यहां के लोगों के लिए खाड़ी के देशों में जाना जैसे अपनों के ही बीच जाना होता है। कारण, वहां उनके इलाके के हजारों लोग रहते हैं। यही नहीं, यहां के किशोरों का पालन-पोषण तक विदेश भेजने की तैयारी के रूप में होता है।
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कानून लागू होने के बाद ऐसे लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब वे क्या करेंगे? घर चलाने के लिए आमदनी का जरिया बंद होता जा रहा है। देश लौटने वाले किसी भी व्यक्ति को अभी तक रोजगार नहीं मिला है।

ठिरिया निजावत खां की आबादी करीब 35 हजार है जबकि यहां विदेशों में रहने वालों युवकों की कुल संख्या तीन हजार है।

मैकेनिक सबसे ज्यादा
ठिरिया निजावत खां के आसपास के हुडला जागीर, सैदपुर, मोहनपुर, परसौना और पदारथपुर विडौलिया गांव के युवक भी सऊदी अरब में नौकरी कर रहे हैं। मैकेनिकों की तादाद सबसे ज्यादा है।

आजाद वीजा होने के कारण नौकरी चले जाने वाले कुछ लोग खुद को वैध तरीके से वहीं रहने के लिए प्रयासरत हैं। सैकड़ों लोग ऐसे भी हैं, जो वीजा ट्रांसफर कराने की जुगत में हैं।

केस-1
वर्ष 2010 में हाउस ड्राइवर के लिए वीजा लेकर जेद्दा में अब्दुल रहमान के यहां नौकरी करने गया था लेकिन कार चलानी आती नहीं थी। सब कुछ पहले से तय था। नाम रहमान का चलता रहा और वह मैकेनिक का काम करने लगा। लौटने से पहले तक करीब 25 हजार रुपये महीने कमा रहा था। लेकिन दो महीने पहले उसी के मालिक ने उसे घर वापस भिजवा दिया। यहां अभी तक कोई रोजगार नहीं मिला है।
- जीशान मोहम्मद

केस-2
वर्ष 2011 में बकरी चराने के वीजा पर सऊदी अरब के अवा शहर में साले नाम के मालिक के बुलावे पर गया था। साले का तो सिर्फ उससे नाम जुड़ा था। बदले में वह उससे पैसा लेता था। उसने आटा मिल में इलेक्ट्रिीशियन की नौकरी कर ली। सब कुछ ठीकठाक चल रहा था। उसके बड़े भाई भी सऊदी अरब में ही हैं. लेकिन तीन महीने पहले उसके मालिक ने उसे भारत वापस भिजवा दिया।
- अतहर अली खां

केस-3
वर्ष 2012 में वह इलेक्ट्रिशियन के वीजा पर सऊदी अरब गया था। उसे अब्दुल्ला नाम के मालिक ने बुलाया था। लेकिन वह इलेक्ट्रिीशियन के बजाय लेबर का काम कराने लगा। 13 महीने किसी तरह से उसने काटे। उसका पैसा भी नहीं मिल पाया। मालिक के आई कार्ड के आधार पर वह घर लौट आया। मालिक ने उसे पासपोर्ट तक नहीं दिया। मजबूरी में उसे अस्थाई पासपोर्ट बनवाकर घर लौटना पड़ा।
-अख्तर हुसैन खां

केस-4
मेरा छोटा भाई नाहिद अली खान सऊदी अरब में सात साल से नौकरी कर रहा है। निकातत कानून की सख्ती की वजह से उसे भी घर वापस आना पड़ रहा है। उसके मालिक ने तो किनारा कर लिया है। मां खुशनूर बेगम हज करने गई थीं, जो एक सप्ताह में लौटने वाली हैं। उसने भी मां के साथ हज की है। मां के आने के बाद वह भी लौट आएगा।
- ताहिर खान

विदेशी करेंसी ने खत्म कर दी तंगहाली
ठिरिया निजावत खां के जाहिद खान 1994 में बतौर पेंटर सऊदी अरब गए थे। उस वक्त उनकी माली हालत इतनी खराब थी कि उन्हें ढाई हजार रुपये उधार लेकर जाना पड़ा था। अब जाहिद के चार बेटे उवैश, डब्बू, जुनैद और राशिद सऊदी अरब में कारोबार कर रहे हैं। यहां उनके परिवार का जीने का अंदाज बदल गया है।

कबीर के परिवार का अंदाज बदला
सऊदी अरब जाने वाले टॉप थ्री लोगों में से एक कबीर अब बूढ़े हो चले हैं। एक समय उनके सामने रोजी-रोटी का संकट था। इन दिनों सऊदी अरब में उनके बेटे सलीम और नईम के अलावा भतीजा मोहम्मद इरशाद एसी-फ्रिज मैकेनिक हैं। कबीर के दोनों बेटों की एक महीने की आमदनी करीब एक लाख रुपये है। निकातत कानून की वजह से उनके काम पर भी संकट है।

यह है निकातत कानून
आजाद वीजा पर सऊदी अरब सरकार में अवैध तरीके से रहकर काम करने वाले पाकिस्तान के एक नागरिक द्वारा अरब नागरिक पर हमले की घटना के बाद निकातत कानून बना है। कानून के तहत बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान का कोई भी नागरिक यदि वहां नौकरी करने जाता है तो वही काम करेगा, जिसके लिए उसके पास वीजा है। दूसरा काम करते पकड़े जाने पर उसे दो साल की सजा होगी। इसके अलावा सऊदी अरब के जिस नागरिक के बुलावे पर वह वहां पहुंचा है, उस पर एक लाख रियाल का जुर्माना होगा।
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छह देशों में लागू है कानून
बरेली (ब्यूरो)। सऊदी अरब, दुबई, कुवैत, इराक, ओमान और बहरीन में अब वर्क परमिट के बगैर कोई नहीं रह पाएगा।
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