विशेष सीबीआई न्यायाधीश एस. लाल ने डिफेंस की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें डिफेंस ने नेपाल-1 चैनल की मालिक नलिनी सिंह और सीबीआई डिप्टी एसपी अनुज आर्य को तलब करने की मांग की थी।
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि नौकर राजकुमार, विजय मंडल और कृष्णा का नार्को टेस्ट विधिक महत्व नहीं रखता है। मामले को विलंब करने के उद्देश्य से डिफेंस ने यह अर्जी दी है। लिहाजा इसे खारिज किया जाता है। बृहस्पतिवार को डिफेंस अब अपनी फाइनल बहस शुरू करेगा।
अर्जी पर बहस करते हुए डिफेंस ने तर्क दिया कि तीनों नौकरों ने अपने नार्को टेस्ट में यह बात स्वीकार की थी कि घटना वाली रात वह हेमराज के कमरे में बैठकर नेपाल-1 चैनल पर नेपाली गीत सुन रहे थे।
सीबीआई के डीएसपी अनुज आर्य ने इस बाबत चैनल-1 की मालिक नलिनी सिंह को बताकर घटना वाले दिन प्रसारित कार्यक्रमों की सूची हासिल की थी।
इस आधार पर डिफेंस ने यह समझाने का प्रयास किया कि सीबीआई जोकि अभी तक सिर्फ यह कहती आ रही थी कि घटना वाली रात घर में आरुषि-हेमराज, राजेश तलवार और नूपुर तलवार ही मौजूद थे, गलत है। इस रात घर में उनके अलावा तीनों नौकर भी थे।
डिफेंस के जवाब में अभियोजन के पीपी आरके सैनी और बीके सिंह का कहना था कि अभियोजन का पक्ष समाप्त हो चुका है।
डिफेंस के अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने 15 अक्तूबर को मौखिक रूप से कोर्ट में कहा था कि वह 21 अक्तूबर से अपनी फाइनल बहस शुरू करेंगे। लेकिन डिफेंस ने बहस न करके यह अर्जी केस को विलंब करने के उद्देश्य से दी है।
अभियोजन ने सुप्रीम कोर्ट की एक रूलिंग पेश करते हुए कहा कि अगर नौकरों ने अपने नार्को टेस्ट के दौरान ऐसा बयान दिया भी है तो भी उसका कोई महत्व नहीं रह जाता।
'घूर रहा है तलवार'
विशेष सीबीआई न्यायाधीश एस. लाल की कोर्ट में बुधवार दोपहर उस समय हंगामा हो गया जब लोक अभियोजक आरके सैनी ने आरोपी राजेश तलवार पर घूरने का आरोप लगाते हुए न्यायाधीश से शिकायत कर दी। सैनी ने यह भी कहा कि केस के बाद तलवार उसे पत्थर भी मार सकता है। दूसरी ओर तलवार ने इन आरोपों का खंडन किया है।