चेन्नई में गुरुवार को विस्फोट हुआ। संजरपुर आशंकित हो गया। पता नहीं गांव के किस बच्चे का नाम इससे जुड़ जाए। इन्हीं आशंकाओं के बीच गांव के मर्द फूलपुर के डा. लोहिया पार्क में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सुनने की तैयारियों में लगे थे। पिछले सात वर्षों से कथित आतंकी गांव का कलंक माथे पर लिए घूम रहे इस गांव के निवासियों की आस्था लोकतंत्र से एक इंच भी डिगी नहीं है।
संजरपुर आतंकी गांव नहीं है। यहां के निवासियों ने बर्मा, मलेशिया, सिंगापुर, इंग्लैंड और अमेरिका में अपनी मेहनत के बल पर समृद्धि हासिल की। लोग बच्चों को पढ़ाते-लिखाते रहे हैं ताकि वे ठीक से पैरों पर खड़े हो सकें। यह बात बयां करते हुए शादाब अहमद उर्फ मिस्टर का दिल भर आता है। बटला हाउस कांड के आरोप में उनका एक बेटा सैफ जेल में हैं और दूसरा डा. शाहनवाज फरार है।
आजमगढ़ जिले के नौ फरार बच्चों में चार संजरपुर के हैं और छह जेल बंद युवकों से तीन इस गांव के हैं। शादाब कहते हैं कि हमारे बच्चे मुल्जिम हैं, अभी मुजरिम तो नहीं हुए। नेता अपराधियों से खूब मिलते हैं लेकिन हमारे बच्चों से कोई मिलने जाए तो वह गुनाह माना जाता है, शक की निगाहों से देखा जाता है। अदालत तो बाद में सजा सुनाएगी और वह भी केवल दोषियों को लेकिन समाज ने तो पूरे गांव को ही सजा सुना दी। आज आजमगढ़ का होने मात्र से कोई हमसे किनारा करने लगता है।