उत्तर प्रदेश में शिक्षिका सीमा तिवारी परेशान हैं, वह मनचाहे जिले में तबादला पाने में तो सफल हो गई हैं पर अब मनचाहे स्कूल में तैनाती नहीं मिल रही है। सीमा तो बस एक उदाहरण भर है।
ऐसे न जाने कितनी शिक्षिकाएं हैं जो घर के आसपास स्कूल में तैनाती चाहती हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी हो या एडी बेसिक उनके यहां रोजाना भारी संख्या में शिक्षक मिल रहे हैं।
कोई जुगाड़ लेकर आ रहा है तो कोई उच्चाधिकारियों से फोन करा रहा है। प्रदेश के अधिकतर जिलों का यही हाल है। शिक्षकों को नौकरी तो सरकारी चाहिए लेकिन पोस्टिंग घर के पास चाहिए।
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा नियमावली के तहत शिक्षकों की नियुक्ति दाता बेसिक शिक्षा अधिकारी है।
बेसिक शिक्षा नियमावली के मुताबिक बहुत जरूरी होने पर ही शिक्षकों का तबादला अंतरजनपदीय किया जाना चाहिए लेकिन प्रदेश की सरकारी राजनीतिक फायदे के लिए एक साथ हजारों की संख्या में तबादला शिक्षकों का करती रहती हैं।
शिक्षकों के अंतरजनपदीय स्थानांतरण का एकमुश्त तबादले का नियम तो बसपा सरकार ने बनाया लेकिन तबादला सपा सरकार ने किया।
सत्ता में आने के बाद सपा ने वर्ष 2012 में 19 हजार और इस साल 17 हजार से अधिक शिक्षकों को तबादला किया गया है।
शिक्षक पहले तो मनचाहे जिलों में तबादला पाने के लिए जुगाड़ लगाते हैं और जब मनचाहे जिलों में तैनाती पा जाते हैं तो घर के आसपास स्कूलों में तैनाती की जुगाड़ में जुट जाते हैं।
उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के स्थानांतरण और समायोजन के लिए 31 जुलाई तक की अवधि निर्धारित की गई थी। इसके आधार पर जिलों में स्थानांतरण के साथ समायोजन की प्रक्रिया पूरी हो गई है।
अब शिक्षक जुगाड़ पानी के सहारे समायोजन को संशोधित कराना चाहते हैं। इसके लिए बीएसए और एडी बेसिक के साथ रोजाना काफी संख्या में प्रार्थना पत्र प्राप्त हो रहे हैं।