उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी की नजर राज्य के उन माननीयों पर है जो आगामी विधानसभा चुनाव में अपना टिकट कटने की आशंका में डरे हुए हैं। दोनों ही दलों की तरफ से ऐसे विधायकों को अपने पाले लाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है।
राज्यसभा चुनाव के लिए हो रही इस कवायद में असंतुष्ट और आशंकित विधायकों को आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पंसद की जगह से टिकट देने के संकेत दिए जा रहे हैं।
राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं, जबकि सपा ने रामगोपाल यादव व धनराज नथवानी को उतार दिया है। ऐसे में हिसाब किताब पक्का दोनों ओर से किया जा रहा है। इन चुनावों के लिए अगर वोटिंग की नौबत आई तो क्रॉसवोटिंग का खेला दोनों ओर किए जाने की कोशिश होगी।
10 सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव में एक सीट निकालने के लिए प्रथम वरीयता के 37 वोटों की जरूरत होगी। जरूरी संख्या का जुगाड़ होने पर सपा अपना तीसरा प्रत्याशी उतारेगी, वहीं भाजपा भी तय कर लेगी कि उसे 8 सीटों पर ही उम्मीदवार उतारने हैं या और आगे बढ़कर खेलना है।
भाजपा सतर्क, सपा में सेंधमारी की तैयारी
पिछले राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ इसलिए जीत गए क्योंकि सपा में क्रॉसवोटिंग हो गई। इस बार सपा की आक्रामकता को देखते हुए भाजपा खासी सतर्क है और अपने उन विधायकों पर खास तौर पर नजर रखे हैं जो समय- समय पर बगावती तेवर किसी न किसी रूप में दिखा चुके हैं।
इनमें एक विधायक बुंदेलखंड से आते हैं। यूं तो भाजपा के पास 255 विधायक व सहयोगी दलों के पास 33 विधायक हैं। इसके अलावा सपा के बागी व असंबद्ध में कई भाजपा के साथ दिखते हैं।
अंकगणित के हिसाब किताब में बाजी पलटने की कोशिश
यूपी विधानसभा में सदस्य सुधाकर सिंह, श्याम बिहारी लाल, विजय सिंह, उमाशंकर सिंह, आलमबदी, अनिल कुमार व छोटे लाल की मृत्यु हो जाने से सात सीट रिक्त हैं। इसलिए 403 सदस्यीय सदन की प्रभावी संख्या 396 है।
भाजपा के 255, अपना दल सोनेलाल के 13, राष्ट्रीय लोकदल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 व निर्बल शोषित हमारा समाज -निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं। इसके अलावा जनसत्ता दल के दो विधायक व असंबंद्ध तीन विधायकों का सपोर्ट भी एनडीए के खेमे को माना जा रहा है।
इस तरह एनडीए के पाले में कुल 293 विधायकों का समर्थन हैं। वहीं, सपा के पास 101 विधायक व कांग्रेस के पास दो विधायक हैं। यह पूरा गणित विधानसभा के रिकार्ड में हैं, लेकिन राज्यसभा चुनाव में उस तरह वोट नहीं पड़ेंगे जैसा लिखापढ़ी में हैं। जमीन पर स्थिति दूसरी ही बन रही है।
राज्यसभा में समर्थन और बदले में टिकट
विधानसभा में अभय सिंह, राकेश सिंह व मनोज पांडेय असंबद्ध विधायक हैं। भाजपा ने केवल मनोज पांडेय को ही मंत्री बनाया है और उनका ही टिकट भाजपा से तय माना जा रहा है बाकी के लिए फिलहाल उहापोह की स्थिति है।
इन तीन के अलावा जिन चार और विधायकों ने पिछले राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉसवोटिंग की थी, उनमें से पूजा पाल भाजपा में पदाधिकारी हैं। सपा को उम्मीद है कि सुभासपा से तीन, रालोद से दो व निषाद पार्टी से कम से कम एक विधायक उसके पक्ष में आ सकता है।
जेल में बंद सपा के एक विधायक का अभी बाहर आ पाना पक्का नहीं है। ऐसे में चार-पांच और विधायकों को अपने साथ लाने पर ही सपा का तीसरा उम्मीदवार निकल सकता है।