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देखिए तो कितनी बेरहम है अखिलेश की ये पुलिस

Wed, 15 Jan 2014 11:49 AM IST
अमर उजाला, फिरोजाबाद
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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में दो श्रमिकों की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों के साथ हाईवे पर सोमवार रात जाम लगाती महिलाओं को पुलिसकर्मियों ने जिस तरह से पीटा उसे देख लोगों का कलेजा कांप उठा था। मंगलवार को दर्द से कराहती महिलाओं की खामोशी में पुलिस के जुल्म की चीख सुनाई दे रही थी।
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मोहल्ला जगजीवन रामनगर निवासी मनोज (22) की ग्राम पीथनी में ट्रैक्टर के टैंपो की टक्कर से मौत हो गई थी। आक्रोशित लोग पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने एवं अक्षय यादव को बुलाने की मांग कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने लोगों पर लाठियां बरसाई थीं। घटना के एक दिन बाद मंगलवार को जगजीवन राम नगर में सन्नाटा छाया था।

पुलिस ने मनोज की मामी सोनकली को लात घूसों से पीटा था। उसकी दूसरी मामी प्रेमा के साथ बदसलूकी की गई। पड़ोसन संतोष के पैर में चोट लगी है। मनोज की पत्नी राजकुमारी का हाथ सूज गया है। पति को खोने के बाद वह सुध-बुध खो बैठी है।
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पुलिस ने मां को भी नहीं बख्शा

पुलिस ने मां कांता को भी नहीं बख्शा। महिलाओं का कहना था कि पुलिस ने दुर्घटना के दोषी ट्रैक्टर चालक को भगा दिया। कांता के तो सिर में भी काफी चोट लगी है। बवाल के दौरान एक भी महिला सिपाही नहीं थी।

जिला अस्पताल में चिकित्सकों की काम बंद हड़ताल का असर सड़क दुर्घटना में सुभाष एवं मनोज के शवों के पोस्टमार्टम पर भी पड़ा। मंगलवार शाम चार बजे तक परिजनों को मनोज का शव नहीं मिल सका था। एसपी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि जाम के दौरान महिलाओं पर लाठीचार्ज मारपीट और अभद्रता की जांच होगी।

जांच एएसपी राकेश कुमार पांडेय को सौंपी है। जो दोषी होंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव ने आईजी से रिपोर्ट मांगी है। उधर बताया जाता है कि महिलाओं पर लाठीचार्ज के मामले को महिला आयोग ने भी संज्ञान में लिया है।

फिरोजाबाद पुलिस की मनमानी पर नपे एसओ

यूपी पुलिस सुधरने को तैयार नहीं है। इस बार फिरोजाबाद की पुलिस ने डीजीपी रिजवान अहमद के निर्देशों की धज्जियां उड़ा दी। फीरोजाबाद में पुलिस ने महिलाओं पर न सिर्फ लाठियां चलाई बल्कि लात-जूते चलाने से भी बाज नहीं आई। मामले के तूल पकड़ने पर जांच के आदेश दिए गए हैं। फिलहाल एक एसओ समेत तीन सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है।

राज्य के डीजीपी रिजवान अहमद ने बहुत ही साफ तरीके से कहा था कि किसी भी दशा में महिलाओं और आम जन के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। जिले के एसपी से मामले की जांच कर दोषियों को चिह्नित कर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया। एक एसओ व तीन सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। भविष्य में भी अगर कहीं ऐसा आचरण पाया गया तो भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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पहले भी दिखा पुलिस का बर्बर चेहरा

फिरोजाबाद का मामला तो ताजा है। इससे पहले अलीगढ़ में भी पुलिस का यही रवैया था। अलीगढ़ में भी पुलिस के आचरण की निंदा हुई थी। हालांकि, वहां पुलिस ने जो मारपीट की थी, उसमें जिले के उच्च अधिकारियों की सहमति थी, लेकिन जब मामले के तूल पकड़ने पर जांच व कार्रवाई की बात आई तो एक सीओ को निलंबित कर मामला रफा-दफा कर दिया गया।

कुछ दिनों पहले प्रतापगढ़ में बार एसोसिएशन के एक पदाधिकारी के दिन-दहाड़े कत्ल का विरोध कर दोषियों को पकड़ने की मांग कर रहे वकीलों पर भी पुलिस की नाराजगी ऐसे ही मुखर हुई थी। वहां भी जमकर लाठी चलाई गई थी।

कुछ महीनों पहले मुरादाबाद के एसएसपी राजेश मोदक राव अपने ही फॉलोवरों को लात-जूतों और डंडे से पीटने के कारण चर्चा में आए थे। मानवाधिकार आयोग पुलिस के इस आचरण पर कई बार नाराजगी जता चुका है और कई मामलों में पुलिस पर हर्जाना भी लगा चुका है।
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