स्थानीय निकायों में अधिशासी अधिकारी (ईओ) के पद पर पदोन्नति देने की व्यवस्था समाप्त करने की तैयारी है।
निकायों में रिक्त ईओ के सभी पदों पर अब सीधी भर्ती की जाएगी। इसके लिए नगर निकाय केंद्रीयत सेवा नियमावली में संशोधन किया जा रहा है।
स्थानीय निकाय निदेशालय ने इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। शीघ्र ही इस पर कैबिनेट से मंजूरी लेने की तैयारी है। निदेशालय का मानना है कि ईओ क्लास टू का पद है और इस पद पर पदोन्नति नहीं दी जानी चाहिए।
उत्तर प्रदेश में निकायों का बहुत महत्व है। शहरी क्षेत्रों में लोगों को जनसुविधा देने के साथ सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी इसके पास ही है।
निकाय में नगर पंचायत, पालिका परिषद और नगर निगम आते हैं। नगर पंचायत सबसे निचली श्रेणी में आते हैं।
नगर निगम केंद्रीयत सेवा नियमावली में दी गई व्यवस्था के मुताबिक नगर पंचायतों में 50 फीसदी पदों पर सीधी भर्ती तथा 50 फीसदी पदों पर पदोन्नति देने का प्रावधान है।
पदोन्नति पाने वाले ईओ को पहली तैनाती नगर पंचायतों में ही दी जाती है।
इसके बाद वरिष्ठता के आधार पर श्रेणी तीन, श्रेणी दो व श्रेणी एक स्तर का अधिशासी अधिकारी बनाया जाता है।
श्रेणी एक स्तर के अधिशासी अधिकारियों को बड़ी पालिका परिषदों का ईओ बनाया जाता है और इस स्तर के अधिकारी की तैनाती जब नगर निगमों में होती है, तो उसे सहायक नगर आयुक्त का पदनाम दिया जाता है।
स्थानीय निकाय निदेशालय का मानना है कि चूंकि ईओ का पद राजपत्रित अधिकारी के समान है। इसलिए इन पदों पर पदोन्नति न देकर सीधी भर्ती की जाए।
इसके आधार पर ही केंद्रीयत सेवा नियमावली की धारा 31 में इसका प्रावधान किया जा रहा है।
इसके अलावा उप नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त के सभी पदों को पहले की तरह से पदोन्नति से ही भरने का प्रावधान रहेगा।
स्थानीय निकाय निदेशालय से भेजे गए प्रस्ताव पर शासन में उच्चाधिकारियों की बैठक में सहमति लगभग बन चुकी है।
नगर विकास मंत्री मो. आजम खां से इस पर मंजूरी लेने के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।