खाद्य आयुक्त के मुताबिक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 तथा प्रचलित शासनादेशों में अपात्र कार्डधारकों से वसूली जैसी कोई व्यवस्था निर्धारित नहीं की गयी है। इस बाबत शासन स्तर से या खाद्य आयुक्त कार्यालय से कोई भी निर्देश जारी नहीं किए गए है। उल्लेखनीय है कि विभाग सदैव पात्र कार्ड धारकों को नियमानुसार उनकी पात्रता के अनुरूप नवीन राशनकार्ड जारी करता है। एक अप्रैल, 2020 से अब तक प्रदेश में कुल 29.53 लाख नए राशनकार्ड विभाग द्वारा पात्र लाभार्थियों को जारी किए गए हैं।
राशन कार्ड संबंधी कोई नया आदेश शासन की ओर से जारी नहीं किया गया है। राशन कार्ड धारकों से राशन के बदले रिकवरी का प्रावधान तो एक्ट में है ही नहीं। उनसे कैसे वसूली की जा सकती है। लगता है जिला स्तर पर कोई कन्फ्यूजन हो गया है।- सौरभ बाबू, खाद्य एवं रसद आयुक्त
ये हैं राशन कार्ड के अपात्र
1. आयकर दाता हों
2. 100 वर्ग मीटर से अधिक का प्लॉट, मकान या फ्लैट हो
3. जिनके चौपहिया वाहन हो, ट्रैक्टर या हार्वेस्टर हो
4. जिनके पास एयर कंडीशनर है,
5. जिनके परिवार की आय गांवों में दो लाख रुपये और शहरों में तीन लाख रुपये से अधिक है,
6. 5 केवीए क्षमता का जनरेटर हो
7. एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हो
8. 05 एकड़ से अधिक सिंचित भूमि हो
कैसे पैदा हो गई भ्रम की स्थिति
अहम सवाल यह है कि प्रदेश में राशन कार्ड सरेंडर को लेकर आखिर यह भ्रम की स्थिति कैसे पैदा हो गई। विभिन्न जिलों में जिलाधिकारियों ने अपात्रों को राशन कार्ड सरेंडर करने और न करने की स्थिति में रिकवरी कराने के आदेश जारी कर दिए। जिलों में जगह-जगह मुनादी तक कराई गई। मीडिया और सोशल मीडिया में यह मुद्दा जोरों से उठा। इसका परिणाम यह रहा कि भ्रामक सूचनाओं के आधार पर लोग अपना राशन कार्ड निरस्त कराने के लिए आपूर्ति कार्यालयों के चक्कर काटने लगे। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को जोरशोर से उठाने लगे। इसके बाद सरकार को इस बाबत स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।