उत्तर प्रदेश के 11 जिलों में आज पहले चरण का मतदान हुआ। इनमें मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, बागपत, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, शामली, अलीगढ़, मथुरा और आगरा जिला शामिल है। यहां 58 सीटों पर कुल 623 प्रत्याशी मैदान में हैं।
उत्तर प्रदेश के पहले चरण का मतदान आज पूरा हो गया। शाम पांच बजे तक 2.27 करोड़ वोटर्स में से करीब 57.79% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सबसे ज्यादा मुजफ्फरनगर में 62.09% और सबसे कम गाजियाबाद 52.4% लोगों ने वोट डाला।
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वोटिंग के दिन कई तरह के मैसेज वायरल हुए। इनमें एक मैसेज वोटिंग से जुड़ा था। वायरल मैसेज में दावा किया गया कि अगर आपका नाम मतदाता सूची में नहीं है तो भी आप वोट कर सकते हैं।
क्या है वायरल मैसेज?
'जब आप पोलिंग बूथ पर पहुंचते हैं और आपका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो बस अपना आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र दिखाएं और धारा 49 ए के तहत "चुनौती वोट" मांगें वोट डालें। यदि किसी ने आपका वोट पहले ही डाल दिया है, तो "टेंडर वोट" मांगें और अपना वोट डालें।'
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वोटिंग के दिन लोग सबसे ज्यादा इसी बात से परेशान होते हैं कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं होता है। कुछ लोगों की ये भी शिकायत रहती है कि उनका वोट किसी और ने डाल दिया है। ऐसे में इस वायरल मैसेज के आते ही कई लोग इसके बारे में जानने की कोशिश करने लगे। हमने इस वायरल मैसेज में किए गए दावे का पड़ताल किया। चुनाव आयोग की वेबसाइट से हमने नियमों के बारे में जानकारी हासिल की।
उत्तर प्रदेश में पहले चरण में लोगों ने वोट दिया।
- फोटो : अमर उजाला
1. धारा 49-ए (चुनौती वोट) : इसके तहत दावा किया गया कि अगर मतदाता सूची में नाम नहीं है, तो भी आधार कार्ड दिखाकर वोट डाल सकेंगे।
पड़ताल में क्या निकला ?
'चुनौती वोट' का मतलब किसी वोट को चुनौती देना होता है। जैसे कि... मान लीजिए शंभू नाम का एक शख्स अपना मतदाता पहचान पत्र और वोटर लिस्ट में दर्ज नाम लेकर वोट देने पहुंचता है। उस दौरान वहां पर मौजूद ऑफिशियल राजनीतिक एजेंट उस शख्स के वोट को चुनौती दे देता है। आमतौर पर फर्जी वोटर, उम्र आदि का विवाद होता है।
वोट को चुनौती देने के लिए दो रुपये की राशि जमा करनी होती है। ऐसी परिस्थिति में मतदान केंद्र पर मौजूद पीठासीन अधिकारी उस चुनौती का परीक्षण करता है। वोट देने के लिए आए शख्स और एजेंट के दावों का परीक्षण करता है। जो सही होता है उसके पक्ष में फैसला लेता है। अगर एजेंट के आरोप सही निकलते हैं तो फर्जी वोट देने आए शख्स को वहीं से पुलिस के हवाले कर दिया जाता है। अगर वोट देने आया शख्स सही निकलता है तो वह अपने मताधिकार का प्रयोग कर लेता है।
हालांकि, इससे यह भी साफ हो जाता है कि इसमें मतदाता सूची में नाम न होने पर वोट डालने के अधिकार का दावा झूठा निकलता है। मतलब अगर आपका मतदाता सूची में नाम नहीं है तो आप बिल्कुल भी वोट नहीं डाल सकते।
2. टेंडर वोट : इसके तहत दावा किया गया कि अगर आपसे पहले किसी ने आपके नाम पर वोट डाल दिया तो भी आप टेंडर वोट के जरिए वोट डाल सकेंगे।
पड़ताल में क्या निकला ?
जब हमने इस दावे का पड़ताल किया तो मालूम चला कि चुनाव आयोग के नियम में टेंडर वोट शामिल है। इस नियम के तहत मतदान केंद्र पर पहुंचने पर अगर आपको ये पता चलता है कि आपका वोट पहले ही किसी ने डाल दिया है तो आप टेंडर वोट के जरिए उसे चुनौती दे सकते हैं। ऐसे परिस्थिति में आपको मतदान केंद्र पर मौजूद पीठासीन अधिकारी से शिकायत करनी होगी। पीठासीन अधिकारी आपसे जुड़े दस्तावेजों की पूरी जांच करेगा। यह जांच की जाएगी कि आपने जो दावा किया है क्या वह सही है? अगर आपका दावा सही निकलता है तो बैलेट पेपर के जरिए पीठासीन अधिकारी आपका टेंडर वोट डलवा सकता है। अगर आपका दावा गलत निकलता है तो फर्जीवाड़े के आरोप में आपको पुलिस के हवाले किया जा सकता है।