फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तर प्रदेश चुनाव: यूपी की सबसे युवा उम्मीदवार रिया से खास मुलाकात, सांसद बुआ से सीख रही हैं राजनीति का 'ककहरा'

सार

रिया ने पुणे के मशहूर कॉलेज सिंबायोसिस कॉलेज से पढ़ाई की है। 2018 में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया है। इसके बाद वे देहरादून में रहकर अपनी आगे की पढ़ाई कर रही थीं। लेकिन पिता की तबीयत खराब होने के बाद वे बिधूना आ गई थीं। वे कहती हैं कि पिताजी शुरू से चाहते हैं कि हम लोग राजनीति में आएं, लेकिन ये अवसर इतनी जल्दी और इस तरह से परिवार के खिलाफ ही मिलेगा कभी सोचा नहीं था...
विज्ञापन
रिया शाक्य - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बिधूना में जनसभा के बाद स्थानीय चुनावी कार्यालय में राजनीतिक चर्चाएं जोरों पर हैं। इसी बीच राज्यसभा सांसद गीता शाक्य वहां पहुंचती हैं। कार से उतर कर जैसे ही वे कार्यालय में जाने के लिए बढ़ती हैं वैसे ही वहां मौजूद कार्यकर्ता उत्साहित हो जाते हैं- 'अरे बुआ जी आ गईं'...'दीदी, सुनिए' कहकर उन्हें रोकते हैं। कहते हैं 'दीदी आज तो ठीक हो गया...योगी जी की रैली अच्छी हुई'...भीड़ भी बहुत आई'।

विज्ञापन


तभी शाक्य कार्यकर्ताओं को टोकती हैं। 'आप चिंता मत कीजिए...सब अच्छा ही होगा। हम लोग यह सीट निकाल लेंगे। आप लोग भी लगे रहिए..लेकिन अभी मुझे अंदर जाने दीजिए...वे थोड़ी चिंता में हैं...उनसे बात कर लेने दीजिए। फिर हम लोग बैठकर बात करते हैं।'   तेजी से कदम बढ़ाते हुए जैसे ही शाक्य कमरे में दाखिल होती हैं...कार्यकर्ताओं के शोरगुल के बीच एक आवाज गूंजती है...'अरे बुआ जी प्लीज...जल्दी इधर आइए...आप कहां रह गई थीं'।

तभी सांसद शाक्य उसे गले लगाती हैं और उसका माथा चूमते हुए कहती हैं...आज बहुत अच्छा बोली है तू। आगे भी ऐसे ही तैयारी किया कर...अगली बार हो तो पढ़कर मत बोलना...सीखते-सीखते सब हो जाएगा...अब घबराना नहीं।

पिता के इशारों से ही घूम जाते हैं वोट!

दरअसल, यूपी की बिधूना सीट पर भाजपा की ओर से सबसे युवा 25 वर्षीय रिया शाक्य मैदान में हैं। रिया, उनके परिवार और इस विधानसभा सीट की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। दो बार के विधायक पिता विनय शाक्य का कभी बहुजन समाज पार्टी और बिधूना में दबदबा था। गांव में ऐसा कहा जाता है कि शाक्य वोट विनय के हाथों के इशारों से घूमते हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में वे स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ भाजपा में आ गए। लेकिन 2022 के चुनाव में जैसे ही स्वामी प्रसाद मौर्या ने पाला बदला। रिया के पिता विनय शाक्य भी समाजवादी हो गए। इसके बाद से ही पिता और पुत्री आमने सामने हो गए।

विज्ञापन


पिता के समाजवादी होने के पीछे मामले में रिया अपने चाचा देवेश शाक्य का हाथ और उन्हें ही जिम्मेदार बताती हैं। अमर उजाला से बातचीत में वे कहती हैं कि देखिए...मेरे पिताजी को सन् 2018 में ब्रेन स्ट्रोक हुआ है। तब से सीएम योगी ने उनके इलाज में हमारी बहुत मदद की। मेरे पिताजी की पूरी राजनीति समाजवादी पार्टी के खिलाफ हुई है। आज वे लिखने-बोलने की स्थिति में नहीं है। अब आप भी मुझे बताइए जो व्यक्ति लिख नहीं सकता...बोल नहीं सकता...वो कैसे क्या लिखेगा और क्या कैसे साइन करेगा...वो केवल इशारों के जरिए अपनी बात कहते हैं। लेकिन मेरे चाचा ने पिता की स्थिति का फायदा उठाकर उन्हें स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल करवा दिया। इसमें मेरे पिता की तो कोई गलती हैं नहीं।

पिता से मिलने और बात करने के सवाल पर कहती हैं कि मेरे पिताजी यहां बिधूना में हमारे साथ नहीं रहते हैं। वे अपने गांव में मेरी दादी और चाचा के साथ रहते हैं। ढाई वर्षों से मैं उनसे नहीं मिली हूं। न ही भाजपा से टिकट मिलने के बाद मैंने पिताजी से कोई बात की है। अब मैं उनसे बात कर किसी तरह का तनाव नहीं देना चाहती हूं, क्योंकि वह पहले ही ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी से परेशान हैं। अब मैं उन्हें ओर परेशान नहीं करना चाहती हूं। भाजपा ने टिकट देकर मुझ पर विश्वास जताया है। मैं अपना बेहतर करने की कोशिशों में जुटी हुई हूं।

विज्ञापन

रिया शाक्य और गीता शाक्य - फोटो : Amar Ujala

इस तरह से भाजपा में हुईं शामिल

विनय शाक्य के भाजपा छोड़कर सपा में शामिल होने के बाद से ही बिधूना सीट को लेकर भाजपा में मंथन का दौर शुरू हो गया था। इस बीच राज्यसभा सांसद गीता शाक्य और कन्नौज सांसद सुब्रत पाठक ने मैदान संभाला। बिधुना के जातीय समीकरण को देखते हुए भाजपा ने ताबड़तोड़ विनय शाक्य की बेटी रिया को मैदान में उतार दिया। इस बीच पिता विनय शाक्य की सपा से मैदान में उतरने की चर्चा थी लेकिन समाजवादी पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।

रिया ने पुणे के मशहूर कॉलेज सिंबायोसिस कॉलेज से पढ़ाई की है। 2018 में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया है। इसके बाद वे देहरादून में रहकर अपनी आगे की पढ़ाई कर रही थीं। लेकिन पिता की तबीयत खराब होने के बाद वे बिधूना आ गई थीं। वे कहती हैं कि पिताजी शुरू से चाहते हैं कि हम लोग राजनीति में आएं, लेकिन ये अवसर इतनी जल्दी और इस तरह से परिवार के खिलाफ ही मिलेगा कभी सोचा नहीं था। चुनाव को लेकर ऐसा लगा रहा है मानो जैसे कोई बोर्ड का एग्जाम चल रहा हो। फिलहाल तो फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया साइट देखना तो दूर फोन पर दोस्तों से बात तक नहीं हो पा रही है। विदेश और बेंगलुरु में बैठे दोस्त मैसेज के जरिए चुनावी मूड पूछते रहते हैं।

मैं सुबह 8 बजे से अपना प्रचार शुरू करती हूं...जो रात आठ बजे तक जारी रहता है। हालांकि इस चुनाव में मेरी मां और भाई भी मेरे साथ प्रचार में लगे हुए हैं। चाचा के सवाल पर रिया कहती है कि अब चाचा मेरा विरोध कर रहे हैं। लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद मेरा एक ही उद्देश्य होगा कि बिधूना में अच्छे स्कूल और कॉलेज खुल सकें। ताकि बच्चों को पढ़ाई अच्छी मिल सके और उनका भविष्य बेहतर हो सके।

गीता शाक्य, सुब्रत पाठक और वरिष्ठ कार्यकर्ता सिखा रहे सियासत का पाठ

रिया को चुनाव की बारीकी समझाने का जिम्मा सांसद गीता शाक्य और सुब्रत पाठक के पास है। दोनों नेताओं ने भी इस सीट पर भाजपा को जीत दिलाने को नाक का सवाल बना लिया है। गीता शाक्य बिधूना में ही रहकर प्रचार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। रिया की चुनावी रैली, जनसंपर्क से लेकर भाषण की कला तक सांसद शाक्य सिखा रही हैं। सांसद गीता शाक्य अमर उजाला से बातचीत में कहती हैं कि हम दोनों एक ही गांव की बेटियां हैं। मैं रिया की बुआ हूं। एक तरह से एक बेटी दूसरी बेटी की मदद ही तो कर रही है। जबकि पाठक को रिया अपना भाई कहती हैं। वे इस चुनाव में मैनेजमेंट का काम देख रहे हैं। इन दोनों नेताओं के अलावा सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने गांव और देहात में प्रचार का जिम्मा संभाला हुआ है। बिधूना में करीब 33 हजार शाक्य वोटर्स, 17 हजार मुस्लिम, 49 हजार ठाकुर, 48 हजार ठाकुर, 47 हजार ब्राह्मण, 17 हजार पाल और 36 हजार लोधी समुदाय के वोटर्स हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें