रिया शाक्य और गीता शाक्य
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इस तरह से भाजपा में हुईं शामिल
विनय शाक्य के भाजपा छोड़कर सपा में शामिल होने के बाद से ही बिधूना सीट को लेकर भाजपा में मंथन का दौर शुरू हो गया था। इस बीच राज्यसभा सांसद गीता शाक्य और कन्नौज सांसद सुब्रत पाठक ने मैदान संभाला। बिधुना के जातीय समीकरण को देखते हुए भाजपा ने ताबड़तोड़ विनय शाक्य की बेटी रिया को मैदान में उतार दिया। इस बीच पिता विनय शाक्य की सपा से मैदान में उतरने की चर्चा थी लेकिन समाजवादी पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
रिया ने पुणे के मशहूर कॉलेज सिंबायोसिस कॉलेज से पढ़ाई की है। 2018 में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया है। इसके बाद वे देहरादून में रहकर अपनी आगे की पढ़ाई कर रही थीं। लेकिन पिता की तबीयत खराब होने के बाद वे बिधूना आ गई थीं। वे कहती हैं कि पिताजी शुरू से चाहते हैं कि हम लोग राजनीति में आएं, लेकिन ये अवसर इतनी जल्दी और इस तरह से परिवार के खिलाफ ही मिलेगा कभी सोचा नहीं था। चुनाव को लेकर ऐसा लगा रहा है मानो जैसे कोई बोर्ड का एग्जाम चल रहा हो। फिलहाल तो फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया साइट देखना तो दूर फोन पर दोस्तों से बात तक नहीं हो पा रही है। विदेश और बेंगलुरु में बैठे दोस्त मैसेज के जरिए चुनावी मूड पूछते रहते हैं।
मैं सुबह 8 बजे से अपना प्रचार शुरू करती हूं...जो रात आठ बजे तक जारी रहता है। हालांकि इस चुनाव में मेरी मां और भाई भी मेरे साथ प्रचार में लगे हुए हैं। चाचा के सवाल पर रिया कहती है कि अब चाचा मेरा विरोध कर रहे हैं। लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद मेरा एक ही उद्देश्य होगा कि बिधूना में अच्छे स्कूल और कॉलेज खुल सकें। ताकि बच्चों को पढ़ाई अच्छी मिल सके और उनका भविष्य बेहतर हो सके।
गीता शाक्य, सुब्रत पाठक और वरिष्ठ कार्यकर्ता सिखा रहे सियासत का पाठ
रिया को चुनाव की बारीकी समझाने का जिम्मा सांसद गीता शाक्य और सुब्रत पाठक के पास है। दोनों नेताओं ने भी इस सीट पर भाजपा को जीत दिलाने को नाक का सवाल बना लिया है। गीता शाक्य बिधूना में ही रहकर प्रचार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। रिया की चुनावी रैली, जनसंपर्क से लेकर भाषण की कला तक सांसद शाक्य सिखा रही हैं। सांसद गीता शाक्य अमर उजाला से बातचीत में कहती हैं कि हम दोनों एक ही गांव की बेटियां हैं। मैं रिया की बुआ हूं। एक तरह से एक बेटी दूसरी बेटी की मदद ही तो कर रही है। जबकि पाठक को रिया अपना भाई कहती हैं। वे इस चुनाव में मैनेजमेंट का काम देख रहे हैं। इन दोनों नेताओं के अलावा सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने गांव और देहात में प्रचार का जिम्मा संभाला हुआ है। बिधूना में करीब 33 हजार शाक्य वोटर्स, 17 हजार मुस्लिम, 49 हजार ठाकुर, 48 हजार ठाकुर, 47 हजार ब्राह्मण, 17 हजार पाल और 36 हजार लोधी समुदाय के वोटर्स हैं।