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उत्तर प्रदेश चुनाव: जातियों में उलझे पूर्वांचल ने थामा जिसका हाथ, वही बना यूपी का सरताज, इस बार किसका चलेगा जादू?

सार

उत्तर प्रदेश भाजपा के नेता शैलेंद्र शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, अय़ोध्या-काशी-प्रयागराज का पुनर्निर्माण और गंगा एक्सप्रेस-वे (काम जारी) बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी और पूर्वांचल की जनता से किया गया अपना वायदा निभाया है। इस चुनाव में वह विकास को बरकरार रखने के लिए और पिछले पांच साल के दौरान हुए कामकाज को ध्यान में रखते हुए वोट करेगी...
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पूर्वांचल एक्सप्रेस वे - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल इलाका जातियों के गणित में बुरी तरह उलझा हुआ माना जाता है। यहां हर दल अपना उम्मीदवार उतारने से पहले जातीय गुणा-भाग करने से नहीं चूकता है। माना जाता है कि उसका जातीय समीकरण ही उसे उसके क्षेत्र में जीत तय करने में प्रमुख भूमिका निभाएगा। अब तक का इतिहास रहा है कि यूपी की विधानसभा में लगभग 162 सीटें देने वाला पूर्वांचल जिस राजनीतिक दल पर अपना भरोसा जताता है, वह सीधे सत्ता तक पहुंचता है। लंबे अरसे से कांग्रेस का गढ़ रहा यह इलाका आज भाजपा की ताकत बन चुका है।

पूर्वांचल और पिछले चुनाव

पिछले चुनाव यानी 2017 में पूर्वांचल ने भाजपा पर जमकर भरोसा जताया। 2014 के चुनाव से शुरू हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों का आकर्षण 2017 में भी कम नहीं हुआ था। देश के विकास की उम्मीद में लोग उन्हें भरपूर समर्थन दे रहे थे। उत्तर प्रदेश, खासकर पूर्वांचल के विकास की उम्मीद में लोगों की निगाह अभी भी प्रधानमंत्री पर ही टिकी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अपनी रैलियों में पूरी ताकत के साथ जनता से कहा कि यदि इस क्षेत्र का विकास करना है तो उसे डबल इंजन की सरकार बनानी पड़ेगी।

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जनता ने भाजपा नेताओं की इस बात पर भरोसा किया और उसे पूर्वांचल की 115 सीटें सौंप दीं। इसका सीधा परिणाम हुआ कि भाजपा ने रिकॉर्ड 312 सीटों पर जीत के साथ सत्ता हासिल की और योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इस चुनाव में सपा को केवल 17 और बसपा को केवल 14 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था।

वर्ष 2012 में पूर्वांचल की जनता ने समाजवादी पार्टी के यादव-मुस्लिम-ब्राह्मण समीकरण पर भरोसा किया और उसे 102 सीटें देकर सीधे सत्ता तक पहुंचाया। समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव राज्य के युवा मुख्यमंत्री बने। पूरी कोशिश के बाद भी भाजपा को इस चुनाव में पूर्वांचल में केवल 17 सीटें ही हासिल हुईं। वहीं, सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी को मात्र 22 सीटों से ही संतोष करना पड़ा और मायावती की पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा रह गया।
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इसी प्रकार, इसके पूर्व यानी वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल की जनता ने बहुजन समाज के ‘दलित-ब्राह्मण’ के सामाजिक समीकरण को स्वीकार किया। कभी ‘तिलक-तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार’ का विवादित नारा देकर दलितों में राजनीतिक चेतना भरने वाली बसपा ने अपना ट्रैक बदला और ‘हाथी नहीं गणेश हैं, ब्रह्मा-विष्णु-महेश हैं’, ‘पंडित शंख बजाएगा, हाथी सत्ता में आएगा’ जैसा नारा दिया।

जातियों की राजनीति में बुरी तरह उलझे पूर्वांचल ने मायावती के इस नारे पर जमकर भरोसा किया और बसपा को शानदार 85 सीटें सौंप दीं। इसका परिणाम हुआ कि लंबे समय बाद उत्तर प्रदेश की सत्ता में कोई दल पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल हुआ।

क्या होगा इस बार?

उत्तर प्रदेश भाजपा के नेता शैलेंद्र शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि पिछले चुनाव में जनता ने अपनी उम्मीदों के कारण भाजपा के लिए मतदान किया था। लेकिन इस चुनाव में वह विकास को बरकरार रखने के लिए और पिछले पांच साल के दौरान हुए कामकाज को ध्यान में रखते हुए वोट करेगी। भाजपा नेता का दावा है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, अय़ोध्या-काशी-प्रयागराज का पुनर्निर्माण और गंगा एक्सप्रेस-वे (काम जारी) बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी और पूर्वांचल की जनता से किया गया अपना वायदा निभाया है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि जनता इस बार पिछली बार से ज्यादा ताकत के साथ भाजपा को वोट देगी, ताकि विकास की यह बयार थमने न पाए।  

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