उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल इलाका जातियों के गणित में बुरी तरह उलझा हुआ माना जाता है। यहां हर दल अपना उम्मीदवार उतारने से पहले जातीय गुणा-भाग करने से नहीं चूकता है। माना जाता है कि उसका जातीय समीकरण ही उसे उसके क्षेत्र में जीत तय करने में प्रमुख भूमिका निभाएगा। अब तक का इतिहास रहा है कि यूपी की विधानसभा में लगभग 162 सीटें देने वाला पूर्वांचल जिस राजनीतिक दल पर अपना भरोसा जताता है, वह सीधे सत्ता तक पहुंचता है। लंबे अरसे से कांग्रेस का गढ़ रहा यह इलाका आज भाजपा की ताकत बन चुका है।
पिछले चुनाव यानी 2017 में पूर्वांचल ने भाजपा पर जमकर भरोसा जताया। 2014 के चुनाव से शुरू हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों का आकर्षण 2017 में भी कम नहीं हुआ था। देश के विकास की उम्मीद में लोग उन्हें भरपूर समर्थन दे रहे थे। उत्तर प्रदेश, खासकर पूर्वांचल के विकास की उम्मीद में लोगों की निगाह अभी भी प्रधानमंत्री पर ही टिकी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अपनी रैलियों में पूरी ताकत के साथ जनता से कहा कि यदि इस क्षेत्र का विकास करना है तो उसे डबल इंजन की सरकार बनानी पड़ेगी।
उत्तर प्रदेश भाजपा के नेता शैलेंद्र शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि पिछले चुनाव में जनता ने अपनी उम्मीदों के कारण भाजपा के लिए मतदान किया था। लेकिन इस चुनाव में वह विकास को बरकरार रखने के लिए और पिछले पांच साल के दौरान हुए कामकाज को ध्यान में रखते हुए वोट करेगी। भाजपा नेता का दावा है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, अय़ोध्या-काशी-प्रयागराज का पुनर्निर्माण और गंगा एक्सप्रेस-वे (काम जारी) बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी और पूर्वांचल की जनता से किया गया अपना वायदा निभाया है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि जनता इस बार पिछली बार से ज्यादा ताकत के साथ भाजपा को वोट देगी, ताकि विकास की यह बयार थमने न पाए।