कड़वी यादें, अब चंद ही तो बची हैं...
मुजफ्फरनगर दंगों के बाद कैराना में भी विश्वास तोड़ने वाली घटनाएं हो गई थीं। पानीपत-शामली रोड पर कैराना के बीचों बीच शिव कुमार और राजेंद्र कुमार को दिन दहाड़े गोली मार दी गई। आज भी उनकी दुकान पर ताला लटका है। इसके बाद कैराना के मुख्य बाजार में विनोद कुमार को गोली मार दी गई। अब उनके भाई वरुण उसी जगह पर बैठते हैं। अच्छे से दुकान चलाते हैं। उन्हें पुलिस से एक सुरक्षाकर्मी मिला है। वे मंदिर या कहीं आसपास जाते हैं तो बिना सुरक्षा कर्मी के जाते हैं। वरुण बताते हैं, मेरे भाई को गोली मार दी गई। वे यहीं तो बैठे थे। बाद में सरकार बदली, माहौल बदल गया। अब तो पहले से बहुत अच्छा माहौल है। 2014 में रंगदारी मांगना शुरू हुआ था। अब सब ठीक है। लोग प्यार प्रेम से रह रहे हैं।
अब बच्चे बाहर गए हैं तो मां-बाप भी जाएंगे
शिक्षक ब्रजेश कुमार कहते हैं कि जिनके बच्चे बाहर चले गए हैं, अब उनके मां-बाप भी गए तो उसे पलायन नहीं कहेंगे। किसी का एक ही बच्चा है तो मां-बाप को साथ में जाना ही होगा। ऐसे में पुश्तैनी जायदाद बेच दी जाती है। ऐसे उदाहरण भी इक्का-दुक्का ही हैं। कैराना में डर जैसा कुछ नहीं है। कई बार रोजगार नहीं होता तो दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। इनके साथ बैठे शिक्षक वसी हैदर कहते हैं, पहले से बहुत बेहतर है। पलायन का नाम है, लेकिन कारोबार के सिलसिले में ज्यादा लोग गए हैं। हिंदू-मुस्लिमों में खूब भाईचारा है। राजनीति अलग बात है। शामली की तरफ जाने वाले राजमार्ग पर बैठे रियाजुद्दीन, फारुख और जगमोहन, कहते हैं, कैराना में हिंदू-मुस्लिम जैसा तो कुछ है ही नहीं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कैराना में आ चुके हैं। उन्होंने पिछले दिनों भाजपा प्रत्याशी के लिए वोट मांगे थे। वे घर-घर पर्चे बांटते नजर आए। शाह ने कहा था, योगी सरकार की वजह से पलायन कराने वाले लोग ही पलायन कर गए। उन्होंने कहा, आज का माहौल देखकर मुझे बड़ी शांति मिलती है। पूरे प्रदेश में विकास की एक नई लहर दिखाई देती है। कैराना में पलायन करने वाले मित्तल परिवार के साथ मैं बैठा था। वे लोग कहते हैं कि अब उन्हें कोई भय ही नहीं है। बस स्टैंड के साथ लगती मस्जिद के सामने बैठे मियां जी कहते हैं, यहां हिंदू-मुस्लिम कुछ है ही नहीं। अगर कोई कारोबार के चलते कहीं दूसरी जगह जाकर बस गया तो उसके मां-बाप भी साथ चले गए। यहां तो हिंदू-मुस्लिम हर त्योहार साथ साथ मनाते हैं।