क्या भाजपा को होगा नुकसान?
दरअसल पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी हैं। वरुण इन दिनों अपनी ही पार्टी के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं। किसानों का मुद्दा हो या लखीमपुर कांड कई मसलों पर वरुण ने पिछले दिनों लगातार अपनी ही सरकार और पार्टी के खिलाफ सवाल खड़े किए हैं। वरुण के बगावती तेवर का भाजपा को नुकसान होता है या नहीं ये 10 मार्च को पता चलेगा। इस बार वरुण गांधी और उनकी मां यानी मेनका गांधी ने भाजपा के लिए प्रचार भी नहीं किया।
वहीं, दूसरी ओर लखनऊ कैंट की पूर्व विधायक और मौजूदा समय में प्रयागराज की सांसद रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी भी बागी तेवर दिखा रहे हैं। रीता जोशी ने खुद बेटे के टिकट के लिए खुलकर बोला था, लेकिन पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया। रीता जोशी ने बेटे के टिकट के लिए खुद का पद भी छोड़ने के लिए कह दिया। लखनऊ में चुनाव से ठीक एक दिन पहले यानी मंगलवार की शाम को मयंक जोशी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात भी की। अखिलेश ने मयंक से मुलाकात की तस्वीर को ट्वीट किया। इसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी।
दोनों जिलों में 2017 में क्या हुआ था?
पिछली बार यानी 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान पीलीभीत की सभी चारों सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थी। वहीं, लखनऊ की नौ में से आठ सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। एक सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह कहते हैं, 'पिछले कुछ महीनों से भाजपा के सांसद वरुण गांधी ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ माहौल बनाया है। वरुण ने न केवल पार्टी के खिलाफ बयान दिया, बल्कि केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार के कामकाज पर भी सवाल खड़े किए। वरुण ने कई ऐसे मुद्दे उठाए, जिसका सीधा असर वोटर्स पर पड़ सकता है। हालांकि, इससे सीटों का नुकसान होगा या नहीं ये अभी से कहना थोड़ा मुश्किल है।'
भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी के बागी होने के सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव कहते हैं, 'रीता जोशी के परिवार का ज्यादातर जनाधार प्रयागराज में है। हालांकि, व्यक्तिगत तौर पर रीता जोशी ने लखनऊ कैंट सीट से दो बार चुनाव जीता है। ऐसे में इस सीट पर भी उनका असर है। हालांकि, रीता जोशी और उनके बेटे अभी खुलकर भाजपा के खिलाफ कुछ नहीं बोल रहे हैं। ऐसे में भाजपा को ज्यादा नुकसान की संभावना नहीं है। हां, वोटिंग से ठीक एक दिन पहले तस्वीर जारी कर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जरूरत जनता का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है।'