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बिना बताए रात या एकदम तड़के निकलते थे एनडी तिवारी

Thu, 08 Aug 2013 12:39 AM IST
अखिलेश वाजपेयी
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वजह चाहे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की हिदायत हो या लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जनता के बीच काम करती हुई सरकार दिखाने की फिक्र।
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मकसद जनता को विकास कार्यों का लाभ दिलाना हो या फिर भ्रष्टाचार व लापरवाह अधिकारियों को रास्ते पर लाना।

अखिलेश यादव भी मुख्यमंत्री बनने के लगभग डेढ़ साल बाद औचक निरीक्षण पर निकल पड़े हैं। इससे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद गेहूं खरीद की खामियां पकड़ने के लिए उन्नाव का आकस्मिक दौरा किया था और कुछ पर कार्रवाई की थी। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ।

प्रदेश के एक सेवानिवृत्त हो चुके वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि औचक निरीक्षण कोई नई बात नहीं है। औचक निरीक्षण होने से कार्यों की गुणवत्ता बनी रहती है। औचक निरीक्षण सरकारी कामकाज का हिस्सा है।
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इसका असर भी हुआ है और लाभ भी दिखा। पर बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष व तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जिस तरह मंचों से निलंबन की घोषणाएं शुरू की थीं, उससे प्रचार तो मिला लेकिन जनता को कोई बहुत लाभ नहीं हुआ। निरीक्षण और निलंबन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

मुलायम व कल्याण का निर्धारित होता था कार्यक्रम
मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह जब मुख्यमंत्री थे तो प्रोग्राम बनाकर दौरा करते थे। पर, कार्रवाई मौके पर नहीं करते थे। दोनों नेताओं की पहली प्राथमिकता हल्की-फुल्की कमी पर समझा-बुझाकर और चेतावनी देकर छोड़ देना होता था।

कहीं कोई विशेष मामला है तो बाकायदा वहां के अधिकारियों को नोटिस जाता था। निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए निलंबन जैसी कार्रवाई होती थी।

मायावती शासन में दो दिन पहले तय होते थे जिले
मुख्यमंत्री मायावती की शैली इन सबसे बिल्कुल अलग थी। अधिकारी बताते हैं कि मायावती किस जिले में दौरा करने जाएंगी, इसका पता उस जिले के जिलाधिकारी को दो दिन पहले होता था।

जिले में वह किस गांव के निरीक्षण करेंगी, इसकी जानकारी संबंधित जिला प्रशासन को 24 घंटा पहले होती थी। मायावती मौके पर ही कार्रवाई करती थीं।

चौधरी चरण सिंह और एनडी के निरीक्षण
चौधरी चरण सिंह और एनडी तिवारी खूब दौरा करते थे। पर, लोगों को मालूम तब होता था, जब वह वहां पहुंच जाते थे। प्रदेश में काफी महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री व विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे डॉ. अम्मार रिजवी, तिवारी जी की सरकार में भी उनके वरिष्ठ सहयोगी रहे।

हेमवती नंदन बहुगुणा भी कार्यक्रम तय करके ही औचक निरीक्षण पर निकलते थे। बहुगुणा जी इतनी गंभीरता व बारीकी से एक-एक काम देखते कि गड़बड़ी मिल ही जाती थी। यही हाल तिवारी जी का था। वह भी किसी को बताए बिना रात या एकदम तड़के कहीं न कहीं निकल लेते थे।

‘ औचक निरीक्षण से मशीनरी अलर्ट रहती है। वह हमेशा सक्रिय रहती है कि न जाने कब कौन सी खामी सामने आ जाए। इसका असर होता है। मुख्यमंत्री औचक निरीक्षण पर निकले हैं, यह अच्छी बात है। इसका विकास कार्यों पर असर नजर आएगा।’
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- आरके मित्तल, पूर्व प्रमुख सचिव

‘औचक निरीक्षण से सुधार होता है। लोगों में चेतना आती है। जनता में भी भरोसा जमता है। साथ ही सरकार को जमीनी जानकारी होती है। साथ ही सरकारी मशीनरी भी सतर्क रहती है कि कहीं गड़बड़ी या चूक हुई तो कार्रवाई हो सकती है।’
-डॉ. आर.पी. शुक्ल, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी
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