उत्तर प्रदेश की आबादी में 12 से 15 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला ब्राह्मण समाज राजनीति में हमेशा से मुददा रहा है। हाल में यूजीसी नियम, फिल्मों के घूसखोर पंडित जैसे टाइटल, एनसीईआरटी की परीक्षा, पुलिस भर्ती परीक्षा, काशी हिंदू विश्वविद्यालय की परीक्षा में पूछे प्रश्नों ने भाजपा सरकार में ब्राह्मणों की उपेक्षा और अपमान की चर्चाओं को हवा दी है। इस स्थिति ने भाजपा नेतृत्व को भी चिंतित किया है।
भाजपा के लिए आसान नहीं
हिंदुत्व की राजनीति कर रही भाजपा कभी नहीं चाहेगी कि ब्राह्मणों का वोट उससे छिटके लेकिन कांग्रेस पर अतिपिछड़ी व अतिदलित जातियों के हितों की उपेक्षा का आरोप लगाकर इनकी लामबंदी करती आ रही भाजपा के लिए प्रत्यक्ष तौर पर ब्राह्मण राजनीति पर फोकस करना आसान नहीं है। ऐसे में ब्रजेश पाठक और मनोज पांडेय जैसे चेहरे आगे आकर बटुक पूजा जैसे आयोजनों से ब्राह्मणों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।