मैनपुरी, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022, आधी आबादी से बात
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उधर, चेन्नई की एक महिला ने शिक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि गांव व शहर की महिलाओं में इतना डिस्क्रिमिनेशन क्यों किया जाता है। शिक्षा को हर जगह क्यों नहीं पहुंचाया जाता। इस महिला ने आगे कहा कि सोशल मीडिया के सहारे अगर हर चीज सभी के पास पहुंचती है तो शिक्षा को क्यों नहीं पहुंचाया जा सकता? पिछले छह साल से मैनपुरी में रही रहीं कोलकाता की एक महिला ने कहा कि लोगों को सोच बदलने की दरकार है। माता-पिता को लड़कियों के मुकाबले लड़को को भी ध्यान देने की आश्यकता है। महिलाओं के साथ अगर अत्याचार होता है तो उसी से 10 सवाल पूछा जाता है। वहीं, उन्होंने रोमियो स्क्वाड के बारे में कहा कि इसकी जरूरत क्यों? बाकी अन्य राज्यों में क्यों नहीं इसकी जरूरत है?
शिक्षा को लेकर क्या बोलीं महिलाएं?
भौतिकी से एमएससी कर चुकीं शैला खान ने कहा कि मैनपुरी में शिक्षा को लेकर विकास हो रहा है। मगर प्रोफेशनल तरीके से जैसा होना चाहिए वैसा नहीं हो रहा है। कुछ कोर्स हैं कुछ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग और परेशान रहते हैं। आकांक्षा मिश्रा ने कहा कि मैनपुरी शिक्षा के लिहाज से काफी बदला है। अच्छे-अच्छे से कॉलेज और स्कूल हैं। शहर पहले से बेहतर हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि यहां और ज्यादा विकास होने की दरकार है, ज्यादा से ज्यादा कॉलेज बनने चाहिए। नीतू तिवारी ने कहा कि उच्च शिक्षा में यहां संभावनाए हैं। पहले से बेहतर विकास हुआ है। शैला खान ने कहा कि हम जिसे वोट करते हैं तो ऐसा लगता है कि वह अच्छा काम करेंगे पर हमेशा मायूसी रहती है। उधर, कहकशा ने कहा कि लॉकडाउन के बाद से बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ा है। काफी बच्चों ने स्कूल छोड़ा है, इसको लेकर एक समिति बनाने की दरकार है ताकि डेटा तैयार की जा सके।