लखनऊ, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022, महिलाओं से चर्चा
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योजनाएं केवल कागजी न रह जाए
रफत फात्मा ने कहा कि मुझे लगता है कि योजनाएं केवल कागजी न रह जाए। जमीनी स्तर पर उसे लागू करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने मिशन शक्ति योजना का मुद्दा उठाया। साथ ही हाथरस की घटना पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में महिला सुरक्षा का मुद्दा है। नम्रता चौहान ने कहा कि सबकुछ सरकार की ही जिम्मदारी नहीं है, कुछ अपनी भी है। लखनऊ विश्वविद्यालय में एक टॉयलेट तक नहीं है, इसका जिम्मदार कौन है? इसका जिम्मेदार वहीं की प्रिंसिपल है, जबकि वो एक महिला है। सवाल सिस्टम का और सिस्टम अभी भी उतनी ही कमजोर है, भष्टाचार अभी भी उतना ही है। उन्होंने कहा कि जिसका काम हो जाता है वो खुश है, जिसका नहीं होता वो खुश नहीं है।
गरिमा ने कहा कि औरतों की सुरक्षा के लिए जो भी नियम व कानून हैं वो कागज पर होते हैं पर समय पर या समय रहते लागू नहीं होते। अगर कोई लड़की काम करके देर रात घर लौट रही है तो वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती है। 1090 पर कॉल करो तो पुलिस भी इतना सक्रिय नहीं होती है। जब तक वह फोन उठाएगी तब तक कांड हो जाता है। फिर पुलिस सबूत मांगने लग जाती है और इसी के बहाने मामले को टाल दिया जाता है। सुनैना चौधरी ने स्वच्छता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शौचालय तो बने पर पुरी तरह नहीं बन पाए। जहां तक महिलाओं की सुरक्षा की बात की जा रही है तो मैं मानती हूं कि सरकार से ज्यादा इसमें समाज की अहम भूमिका है। अगर समाज चाहे तो महिलाएं खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगी।
सुनिता रमन ने कहा कि गरीब महिलाओं को उतना सपोर्ट नहीं मिलता। वह ज्यादातर घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। निचले तबके की महिलाओं को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं ऋतु अरोड़ा ने कहा कि लड़कियों की पढाई के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता है। जब तक महिलाएं व लड़कियां साक्षर नहीं होंगी तब तक वह सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी। अपने लिए आवाज उठाना जरूरी है। इस दौरान एक महिला ने महंगाई का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरसों का तेल 200 रुपये हैं और गैस सिलेंडर का दाम 1000 रुपये है।
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सरकार को सीधे-सीधे दोष देना गलत
रुची रस्तोगी ने कहा कि कभी भी किसी सरकार को सीधे-सीधे दोष देना गलत है। महिलाओं को खुलकर सामने आना चाहिए और मिलकर आवाज उठाना चाहिए। अर्पना मिश्रा ने कहा कि लखनऊ काफी बदल गया है। निचले तबके की महिलाओं तक जागरुकता पहुंचाने की दरकार है। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है। पत्रकार रोली ने कहा कि सुधार की गुजाइंशें हमेशा बनी रहती हैं। आप हमेशा किसी को 100 फीसदी नंबर में नहीं आंक सकते हैं। बदलाव हो रहे हैं। रश्मि सिंह- पिछले पांच साल में परिवर्तन हुआ है। ऊषा सिंह ने कहा कि सरकार योजना तो बहुत अच्छी बनाती है लेकिन जब उस पर काम करना होता है वो तो बिल्कुल फिस हो जाता है। उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर तो दे दिया गया लेकिन गैस कहां से भरवाई जाए? पिंक बूथ बनाना ही महिलाओं का सुरक्षा होना नहीं है। 1090 पर कॉल करो पुलिस फोन नहीं उठाती और तब तक कांड हो जाता है। वहीं, एक महिला ने कहा कि सपा सरकार में महिलाएं इतना सुरक्षित नहीं थी जितनी आज हैं।
योगी सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है
ज्योत्सना मिश्रा ने कहा कि महिला सुरक्षा के मामले में सब मानसिकता का सवाल है। सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती है। हम घरों में लड़कियों के मुकाबले लड़कों को समझाएं तो रेप जैसी घटनाएं नहीं होंगी। बेटो को अच्छी शिक्षा देनी चाहिए तो इसमें सुधार हो सकती है। वहीं, इस एक महिला ने कहा कि क्यों इसमें सरकार की गलती क्यों नहीं है? जब थाने एफआईआर कराने जाओ तो रिपोर्ट नहीं लिखी जाती। अगर आवाज बुलंद की जाती तो सरकार डराती है। गीता ने कहा कि योगी सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है। पहले सपा की सरकार में लोग सभी चौराहे पर शराब पीते रहते थे। लड़कियों को उठा लेते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होता। कल्पना ने कहा कि पहले से काफी कुछ सुधार हुआ है। महिलाएं पहले से ज्यादा खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं।सावित्री घोष ने कहा कि योगी मोदी सरकार में बहुत काम हुआ है।