सफीपुर। शाह खादिम सफी के सालाना उर्स के दूसरे दिन हजारों मुरीदों की भीड़ उमड़ी। उर्स में जाति और धर्म का कोई स्थान नहीं रहा। मजार के शमाखाने में आयोजित महफिल में मशहूर कव्वालों ने शफी की शान में बेहतरीन कलाम पेशकर महफिल की रौनक बढ़ा दी। चादर चढ़ाने, मन्नत मांगने और मजार के गुस्ल स्नान का पानी लेने के लिए मुरीदों का तांता लगा रहा।
पीरी फकीरी के नाम से पहचान रखने वाले शाह सफी का साला उर्स अपने दस्तूरों के साथ शनिवार को शुरू हुआ। शुरुआत गुस्ल स्नान और आतिश बाजी से हुई।
शनिवार रात को शाह सफी का फातेहा पढ़ा गया जिसमें हजारों मुरीदों ने शिरकत की। इसके बाद मिलादुन्नबी का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न प्रांतों से आए मशहूर शायरों ने मोहम्मद साहब की शान में नात शरीफ पढ़ी। देर रात मजार से आराईश का जुलूस उठा जो कसबा के विभिन्न मोहल्लों से होता हुआ वापस मजार पहुंचा।
शायरों और कव्वालों ने कलाम पेश किए। तिलावते पाक के बाद पहला कुल शरीफ पढ़ा गया। अपने पीर की मजार पर आकर चादर चढ़ाने और मन्नतें मांगने वालों का तांता लगा रहा। इस मौके पर सज्जादानशी लायक नाजिम के अलावा शाहिद नाजिम, पप्पू, शीलू ने स्वागत किया।