फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Unnao News: सत्यापन में लापरवाही से पकड़ में नहीं आ रहे बांग्लादेशी

विज्ञापन
विज्ञापन
उन्नाव/सोनिक। फैक्टरियों और स्लॉटर हाउसों में श्रमिकों के सत्यापन में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इसी लापरवाही के कारण बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। हाल ही में अचलगंज थानाक्षेत्र के एक स्लॉटर हाउस से बांग्लादेशी सैफुल को गिरफ्तार किया गया था।
विज्ञापन

सैफुल का सत्यापन फॉर्म एलआईयू को नहीं मिला था जिससे उसकी पहचान नहीं हो पाई। एटीएस को भनक लगने पर उसे पकड़ा गया और सच्चाई सामने आई। दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र और अचलगंज में सौ से अधिक छोटी-बड़ी इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों में 50 हजार से अधिक श्रमिक काम करते हैं, जिनमें ठेकेदार भी शामिल हैं। ये श्रमिक दही थानाक्षेत्र के विभिन्न इलाकों में किराए पर रहते हैं। अधिकतर श्रमिक दूसरे शहरों और प्रांतों के हैं। उन्होंने जुगाड़ से यहीं का आधार कार्ड बनवा रखा है। इससे पुलिस, एलआईयू या आईबी उन्हें पकड़ नहीं पाती। एटीएस या एसटीएफ को लीड मिलने पर ही ऐसे बांग्लादेशी पकड़े जाते हैं।



सत्यापन की धीमी गति

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक केवल 900 किराएदारों का ही सत्यापन हो पाया है। सत्यापन की यह गति बहुत धीमी है। इतनी बड़ी संख्या में श्रमिकों के बीच कुछ बांग्लादेशियों का मिलना कोई बड़ी बात नहीं है। कई श्रमिकों के पास पुलिस द्वारा बनवाया गया चरित्र प्रमाणपत्र भी हो सकता है।
विज्ञापन




जांच एजेंसियों की भूमिका

एटीएस ने 25 फरवरी की रात सैफुल को दही क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। जांच में उसका आधार कार्ड फर्जी निकला। सूत्र बताते हैं कि एटीएस फोन ट्रैकिंग के माध्यम से बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं तक पहुंच जाती है। एएसपी अखिलेश सिंह ने बताया कि जांच जारी है और ऐसा कुछ सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस, एलआईयू और अन्य एजेंसियां अपना काम कर रही हैं।








फॉलोअप



दस माह से फरार रोहिंग्याओं का पुलिस नहीं लगा पाई पता



मनोहर नगर झोपड़ पट्टी में बिना किसी भारतीय नागरिकता के रह रहा था म्यांमार का परिवार



दस के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की थी प्राथमिकी, चार को भेजा था जेल, छह अभी भी फरार



संवाद न्यूज़ एजेंसी



उन्नाव। शुक्लागंज के मोहल्ला मनोहर नगर गंगा किनारे झोपड़ पट्टी में बिना किसी भारतीय नागरिकता के म्यांमार देश के रहने वाला दस सदस्यीय परिवार के खिलाफ पुलिस ने साल 2025 में सभी दस के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर परिवार के चार लोगों को गिरफ्तार किया था, छह भाग निकले थे। उनका अब तक पुलिस पता नहीं लगा पाई है। पुलिस रिकॉर्ड में उनका कोई अता-पता नहीं है। जिस जगह परिवार रहता था वह झोपड़ी बंद है। पुलिस के साथ अब इंटेलिजेंस को भी लगा दिया गया है।



गंगाघाट कोतवाली पुलिस ने 21 मई 2025 को अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बुसीडोंग म्यांमार के जिला सिद्दरफारा मोगंडो सिटी निवासी मो. साहिल, अनवर, हवीबुल्ला, असमत, रोहिमा बेगम, याहियां, सिनवारा बेगम, जुनैद, अजीदा व नूरकायदा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें साहिल, अजीदा, सिनवारा बेगम, नूर कायदा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था, छह अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। जिनका पुलिस अब तक कुछ पता नहीं लगा पाई है। इस मामले में यहीं के पूर्व सभासद शहजादे को विदेशी नागरिकों के अवैध रूप से रहने में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था। मामले विवेचना कर रहे गंगाबैराज चौकी इंचार्ज मान सिंह ने बताया कि सभी आरोपियों को पकड़ने के लिए सूचना मिलने पर दबिश दी जा रही है। इसके लिए इंटेलिजेंस की टीम भी लगाई गईं है। जिस जगह परिवार रहता है वहां के आसपास लोगों ने बताया कि तीन माह पहले रात के अंधेरे में कुछ लोग आए थे और परिवार को अपने साथ कहीं लेकर चले गए थे, पुलिस को इसकी भनक बाद में लगी, पुलिस आई भी लेकिन तब ताला बंद मिला था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें