बीघापुर। अनुसूचित जाति की छात्रा की हत्या में बुधवार को तीन डॉक्टरों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम किया। इसमें गला कसने से मौत की पुष्टि हुई है। दुष्कर्म की आशंका पर स्लाइड बनाई गई है। गांव का एक किशोर छात्रा के पीछे जाते दिखा था। पुलिस शक के आधार पर उससे पूछताछ कर रही है।
बिहार थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी कक्षा चार की छात्रा मंगलवार सुबह सात बजे खेत जाने की बात कहकर घर से निकली थी। दोपहर दो बजे के बाद उसका शव पोखरी जाने वाले रास्ते के किनारे जंगल में पड़ा मिला था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने फॉरेंसिक टीम के साथ जांच की थी। पिता की तहरीर पर अज्ञात पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है।
बुधवार को पैनल में शामिल नवाबगंज सीएचसी के डॉ. देवेंद्र कुमार, बांगरमऊ सीएचसी के डॉ. सुनील राठौर और बिछिया सीएचसी की डॉ. नेहा गुप्ता ने शव का पोस्टमार्टम किया। इसमें गला कसने से मौत की पुष्टि हुई है। दुष्कर्म की आशंका पर स्लाइड बनाई गई है। पुलिस ने शक के आधार पर गांव के ही अनुसूचित जाति के किशोर को हिरासत में लिया है। चर्चा है कि वह किशोरी चाहता था। किशोरी के विरोध करने पर उसने हत्या कर दी। फिलहाल अभी पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है।
जिस किशोर को पुलिस ने उठाया है, वह चंडीगढ़ में मजदूरी करता था। वह 20 नवंबर को घर आया था। वह गांव के बाहर बसहा तालाब में मछली मारने का काम करता था। घटना वाले दिन किशोर साथियों संग तालाब पर रुका था। बाद में छात्रा के पीछे जाते भी देखा गया था। एसओ राहुल सिंह ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम हुआ है। गांव के किशोर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जल्द घटना का खुलासा होगा।
पात्र होने पर भी परिवार को नहीं मिला शौचालय
घर में होता शौचालय तो न जाती छात्रा की जान
संवाद न्यूज एजेंसी
बीघापुर। पात्र होने के बाद भी छात्रा के परिवार को कॉलोनी और शौचालय का लाभ नहीं दिया गया। इस कारण किशोरी को जान गंवानी पड़ी।
छात्रा मंगलवार सुबह सात बजे शौच के लिए घर से निकली थी। उसके घर में शौचालय नहीं है। मां मानसिक रूप से अस्वस्थ और पिता पैर से दिव्यांग हैं। इसके बाद भी पीड़ित परिवार को न ही सरकारी कॉलोनी मिली और न ही उसे शौचालय मिल सका। मृतका के चाचा का कहना है कि परिवार को अगर यह सुविधा मिल गई होती तो शायद भतीजी को जान न गंवानी पड़ती। ग्राम प्रधान शोभा यादव ने बताया कि पूर्व इस परिवार का सूची में नाम नहीं था। इस कारण उन्हें लाभ नहीं मिल पाया। इस बार कॉलोनी और शौचालय के लिए नाम भेजा गया है।