उन्नाव। ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को पूरे दिन धूप नहीं निकली। तेज गति से चली हवाओं ने शीतलहर का अहसास कराया। सर्दी के साथ गलन बढ़ने से लोग परेशान हो गए। मौसम विशेषज्ञ ने बुधवार को भी घने कोहरे का पूर्वानुमान जताया है।
सोमवार की रात नौ बजे से कोहरा शुरू हो गया था। मंगलवार सुबह दस बजे तक कोहरा छाया रहा। आधी रात को कोहरा काफी घना हो गया था। इससे दृश्यता काफी कम हो गई थी। मंगलवार को पूरे दिन धूप नहीं निकली। इससे लोगों को कड़ाके की ठंड का अहसास हुआ। शाम ढलते ही गलन बढ़ गई। लोगों की उंगलियों ने काम करना बंद सा कर दिया। हवाओं की औसत गति 2.8 किमी प्रति घंटा रही।
चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डाॅ. सुनील पांडेय ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, हवाओं की गति और बढ़ने की संभावना है। रात के साथ दिन में भी गलन रहेगी। कोहरा और घना होगा। अभी बारिश की कोई संभावना नहीं है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 16.6 और न्यूनतम पारा छह डिग्री सेल्सियस रहा।
पाले से फसलों को बचाएं किसान
प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी शशांक कुमार ने बताया कि कोहरे व पाले से रबी फसलों को बचाना जरूरी है। इसके लिए कीटनाशक का छिड़काव जरूरी है। किसान व्हाट्सएप नंबर 9452247111, 9452257111 पर कीट/रोग की फोटो खींचकर नाम, पता, विकास खंड और जनपद का नाम लिखकर भेज दें। 48 घंटे में मोबाइल पर समाधान भेज दिया जाएगा।
इन कीटनाशकों का किसान कर सकते प्रयोग
-राई/सरसों में माहू एवं पत्ती सुरंगक कीट के नियंत्रण के लिए किसान कीटनाशक एजाडिरेक्टीन 0.15 प्रतिशत ईसी की 2.5 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर छिड़काव करें। अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा, सफेद गेरूई एवं तुलासिता रोग नियंत्रण को मैकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी अथवा जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2 किग्रा मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए।
-चना/मटर में फली बेधक एवं सेमीलूपर कीट के नियंत्रण को खेतों में बर्ड पर्चर लगाना चाहिए। बीटी 1.0 किग्रा अथवा एनपीवी 2 प्रतिशत एएस 250-300 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में घोलकर छिड़काव करें। बुकनी रोग के लिए घुलनशील गधंक 80 प्रतिशत 2 किग्रा अथवा ट्राइडेनेफान 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 250 ग्राम का 500-600 लीटर पानी में घोल बना कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
-गेहूं में अमूमन चौड़ी एवं संकरी पत्ती वाले खरपतवारों जैसे गुल्ली-डंडा, चटरी-मटरी, बथुआ, कृष्णनील आदि की समस्या देखी जाती है। संकरी एवं चौड़ी पत्ती खरपतवारों के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत के साथ मेटासल्फ्यूरान मिथाइल 5 प्रतिशत डब्ल्यूजी 16 ग्राम (1 यूनिट) अथवा मट्रीब्यूजिन 70 प्रतिशत डब्ल्यूडी 100-120 ग्राम को लगभग 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से प्रथम सिंचाई के बाद 25 से 30 दिन के समय पर छिड़काव करें।
-आलू में अगेती एवं पछेती झुलसा रोग के नियंत्रण को जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 20 किग्रा अथवा कनपर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 25 किग्रा की मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से लगभम 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।