उन्नाव/परियर। गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु 112 मीटर से नीचे पहुंच गया है। रविवार को जलस्तर 111.990 मीटर पर पहुंच गया, लेकिन प्रभावित गांवों के लोगों की समस्या कम नहीं हो रही है। फसलें डूबने से खराब हो गईं हैं। वहीं पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या बनी हुई है। अभी भी ग्रामीण अपने खेत व बागों में नाव से आ जा रहे हैं।
गंगा का पानी कम हो रहा है। इसके बाद भी सदर तहसील के गंगा किनारे बसे माना बंगला, बाबू बंगला, बंदनपुरवा, लालतुपुरवा, पनपथा, धनकुखेड़ा, कोलवा, जुड़ापुरवा, पटियारा, महानंदपुरवा, बेनीपुरवा, टेपरा व अतरी सहित दो दर्जन गांवों
के पास पानी लगा हुआ है। कई गांवों के आवागमन के रास्ते बाढ़ से कट गए हैं। तरोई, लौकी, भिंडी, कद्दू, धान आदि की फसल पानी में खराब हो गई है। लोगों को अपनी बची हुई फसल के लिए खेतों व अमरूद के बागों में जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
बीघापुर। तहसील क्षेत्र के गंगा व पांडु नदी के बीच बसी ग्रामसभा दूलीखेड़ा के मजरे चौड़ा का पुरवा, भरोसे का पुरवा तथा लालखेड़ा के मजरों में जलस्तर कम होने से जहां किसानों ने खेतों में खड़ी धान की फसल उठाने के लिए कटाई का कार्य चालू कर दिया है।
चौड़ा का पुरवा निवासी किसान सियाराम व तेजू ने बताया कि धान काटने का कार्य चालू किया है। कटी फसल को उठाकर ऊंचे स्थानों पर एकत्रित कर रहे हैं। किसान जगतपाल अपने मिर्ची की फसल को बचाने की जुगत में पड़े हुए हैं। दूलीखेड़ा निवासी आकाश यादव ने बताया कि पानी कम होने से जगह-जगह गड्ढों में पानी भर जाने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है।
वहीं बुखार और जुखाम से पीड़ित लोगों की संख्या गांव में बढ़ रही है। ग्रामसभा गढ़ेवा, करमी, चंदनपुर में जलस्तर कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली है लेकिन गढ़ेवा के मजरे के किसानों को बाढ़ के चलते बोए गए खेत पूरी तरह खराब हो गए है।