गंजमुरादाबाद में खेतों में जलती फसल अवशेष।
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गंजमुरादाबाद। कड़े निर्देशों के बावजूद भी ग्रामीण इलाकों में पराली (फसल अवशेष) जलाना रुक नहीं रहा है। किसान धड़ल्ले से खेतों में पराली जलाकर वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं।
सरकार ने खेतों में पराली जलाने से लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दंड निर्धारित कर रखा है। जिसके अंतर्गत खेतों में पराली जलाने पर लघु सीमांत किसानों पर ढाई हजार, सीमांत किसानों पर पांच हजार और वृहद किसानों पर 15 हजार रुपये का जुर्माना या 6 माह के कारावास की सजा निर्धारित की गई है। पिछले एक महीने से दिल्ली सहित कई राज्यों के साथ ही उन्नाव जनपद में भी वायु प्रदूषण का असर दिखाई दे रहा है। जिससे पराली जलाने पर यहां भी प्रशासन सख्त हो गया है। जिसके अंतर्गत क्षेत्र में धान की फ सल कंबाइन मशीन से कटाने पर रोक लगा दी गई है लेकिन फि र भी क्षेत्र के किसान जानकारी के अभाव में खेतों में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। जिससे क्षेत्र में प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है।
राजकीय कृषि बीज भंडार प्रभारी देवी सिंह ने बताया कि खेतों में पराली जलाने और कंबाइन मशीन से फ सल कटवाने और खेतों में जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। यदि कोई भी किसान ऐसा करते पाया जाता है तो उसके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।