मियागंज सीएचसी में वैक्सीन की जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद
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चकलवंशी। प्रथम द्रष्टया जांच में ही वैक्सीन फर्जीवाड़े की परत-दर-परत खुलने लगी है। चार सदस्यीय टीम ने मियांगज सीएचसी पहुंचकर जांच शुरू की तो एक फ्रिजर (आईएलआर) को छोड़ तीन ठीक मिले। इसके बावजूद महिला के घर में वैक्सीन रखवाई गई थी। सीएचसी से टीकाकरण केंद्रों को भेजी गई वैक्सीन की वापसी का स्टॉक बुक में रख रखाव दुरुस्त नहीं मिला। घर में वैक्सीन रखने वाली महिला किसी पद पर न होने के बाद भी एनएचएम मद से उसे पारिश्रमिक का भुगतान किया जा रहा था। जांच टीम रिपोर्ट सीएमओ को देगी।
अपर निदेशक स्वास्थ्य पीएन बाजपेई के आदेश पर गठित जांच टीम में शामिल एसीएमओ डॉ. ललित कुमार, जिला अस्पताल के डॉ. धीर सिंह, कोल्डचेन मैनेजर नीरज निगम व रिफ्रजरेटर मैकेनिक सुनील कुमार दोपहर एक बजे सीएचसी पहुंचे। यहां सीएचसी प्रभारी रहे डॉ. आफाताब, एएनएम संगीता पटेल व महिला रानी से जानकारी ली। डॉक्टर ने महिला के घर में वैक्सीन न रखने की बात कही। एएनएम के मुताबिक डॉक्टर के कहने पर ही वैक्सीन रखी गई थी। जांच टीम को सीएचसी में चार फ्रिजर (आइसलाइंड रिफ्रजरेटर मिले) मिले। इसमें सिर्फ एक ही खराब है। तीन सही पाए गए। इसके बाद भी वैक्सीन उनमें नहीं रखवाई गई थी।
टीम के मुताबिक एक से अधिक फ्रिजर इसीलिए होते हैं कि एक खराब हो जाए तो दूसरे में रखकर वैक्सीन का तापमान सही रखा जाए। रानी किसी पद पर कार्यरत नहीं है। उसे बिना अनुमति के रखा गया और एनएचएम मद से 2400 रुपये महीने दिए जा रहे थे। जांच के दौरान छह महीने का रिकॉर्ड मिला है। सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
जांच टीम ने जिले से स्वास्थ्य केंद्र भेजी गई वैक्सीन की डोज के साथ लगाई गई और बूथों पर से वापस आई वैक्सीन का भी मिलान किया। इसमें 3 नवंबर को सीएचसी 6010 डोज भेजी गई थी। इसमें शुक्रवार को सीएचसी में 3170 डोज मौजूद मिली। सीएचसी से जो बूथों पर वैक्सीन भेजी गई थी। उसमें वापस आई वैक्सीन का सही डाटा स्टॉक बुक पर चढ़ा नहीं मिला।