जिला अस्पताल परिसर में धरना प्रदर्शन करते एंबुलेंस चालक व ईएमटी। संवाद
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उन्नाव। कई राउंड बातचीत और समझाने के बाद भी एंबुलेंस चालक काम पर नहीं लौटे। तीन दिन से जारी 108, 102 व एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस के चालक व ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) बुधवार को भी हड़ताल पर रहे। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत एआरटीओ के कहने पर टेंपो चालक एंबुलेंस चलाने के लिए पहुंचे लेकिन एडीएम इस पर सहमत नहीं हुए। बाद में मरीजों की परेशानी देखते हुए पदाधिकारियों के कहने पर 12 और चालक एंबुलेंस चलाने को राजी हो गए।
मंगलवार रात एडीएम राकेश कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट चंदन कुमार पटेल, एएसपी शशिशेखर सिंह, सीएमओ डॉ. सत्य प्रकाश जिला अस्पताल में चल रहे एंबुलेंस कर्मचारियों के धरना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों के दबाव बनाने पर चालकों ने एंबुलेंस की चाभियां प्रोग्राम मैनेजर विराट श्रीवास्तव को दे दीं। एआरटीओ के कहने पर टेंपो अड्डा ठेकेदार कई टेंपो चालकों को लेकर एंबुलेंस चलवाने के लिए लेकर पहुंचा। टेंपो चालकों से एंबुलेंस चलवाने की बात पर एडीएम ने सहमति नहीं दी और चाभियां वापस दिलाईं। बातचीत के बाद एंबुलेंस चालक संघ के जिलाध्यक्ष विवेक कुमार ने 12 एंबुलेंस और चलाने की सहमति दी। 87 में 24 एंबुलेंस का संचालन शुरू होने से समस्या काफी हद तक हल हो गई है। हालांकि इसके बाद 63 एंबुलेंसों का चक्का बुधवार को भी जाम रहा। जिलाध्यक्ष विवेक कुमार ने बताया कि एंबुलेंस सेवा बेहद महत्वपूर्ण सेवा है। हड़ताल के पहले ही दिन इमरजेंसी सेवा के लिए सात, दूसरे दिन पांच व तीसरे दिन एक साथ 12 एंबुलेंसों का संचालन शुरू कर दिया गया। बुधवार को 24 एंबुलेंस चलने से मरीजों को अधिक परेशानी नहीं हुई। चालकों का कहना है कि जब तक संगठन के प्रांतीय पदाधिकारी हड़ताल खत्म नहीं करते तब तक जारी रहेगी।
प्रदेश अध्यक्ष हनुमान प्रसाद पांडेय ने चालक व ईएमटी से आह्वान किया है कि मांगे पूरी करने के लिए गुरुवार दोपहर तक का समय सेवा प्रदाता कंपनी जिगित्सा कंपनी के अधिकारियों को दिया गया है। तय समय में यदि सुनवाई नहीं होती है तो सभी एंबुलेंस चालक व ईएमटी चाभियां संबंधित अधिकारी को देकर लखनऊ जाएंगे। आगे की रणनीति वहां तय की जाएगी।