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अव्यवस्थाओं पर जीत की पाठशाला

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खुले आसमान के नीचे खंडहरनुमा घर के बाहरी हिस्से में बच्चों को निशुल्क शिक्षा देते युवा टीम। संवा? - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। गरीब परिवारों के बच्चों को अशिक्षा की गलियों से निकाल कर शिक्षा के उजियारे में लाने के जुनून में जुटी एक युवाओं की टोली लोगों के लिए नजीर बनी है। यह युवा बच्चों को मुफ्त पढ़ाने के साथ ही अपने पास से कॉपी व किताबें भी उपलब्ध कराते हैं। यह टोली इस समय जरूरतमंद परिवार के 65 बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
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लोधनहार निवासी अमित यादव ने इंटर तक पढ़ाई की है। वह पेशे से इलेक्ट्रीशियन हैं। प्राथमिक विद्यालय मोहल्ले से दूर होने और अभिभावकों में बच्चों की शिक्षा को लेकर उदासीनता से लोधनहार, गंगूखेड़ा सहित आसपास कई मोहल्लों के बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। अमित ने अभिभावकों को समझाया लेकिन सार्थक परिणाम नहीं आए। इस पर उन्होंने मुफ्त पाठशाला खोलने की ठानी। उसने अपने स्नातक पास भाई पूर्वांचल यादव, एक क्लीनिक में काम करने वाले मोनू, कैफे चलाने वाले पंकज यादव, बबलू सहित अन्य दोस्तों को अपने साथ जोड़ा और मुफ्त पाठशाला खोलने की योजना बनाई।
आपस में चंदा कर मोनू के खंडहर घर के बाहरी हिस्से में अपने खर्च से तिरपाल व अन्य जरूरी व्यवस्था कर पाठशाला की शुरूआत की। कबाड़ बीनने, फल विक्रेताओं और श्रमिकों को समझाकर बच्चाें को रोजाना शाम को दो घंटे मुफ्त शिक्षा देना शुरू किया। इस समय इस पाठशाला में 10 साल की उम्र तक के 65 बच्चे मुफ्त पढ़ रहे हैं।
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मोनू वर्मा की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। व्यवस्थाओं के अभाव में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आस पड़ोस के बच्चों को शिक्षित करने का जिम्मा उठा लिया। जहां पर वह बच्चों को पढ़ाते हैं वहां छत नहीं है। बारिश होने पर छुट्टी करनी पड़ती है। युवा टोली में शामिल अमित, मोनू, पूर्वांचल, पंकज, बबलू ने बताया कि उन्हें इसकी प्रेरणा जरूरतमंद बच्चों को देखकर मिली। बच्चों को पढ़ाने पर आने वाला खर्च वह आपस में मिलकर वहन करते हैं।
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