पॉलीथीन पर प्रतिबंध को बनाया गया कानून गुरुवार 21 जनवरी से प्रभावी हो जाएगा। साथ ही पॉलीथीन का बैग व पन्नी का प्रयोग प्रतिबंधित हो जाएगा।
प्रदूषण विभाग ने इस बाबत शासनादेश मिलने की पुष्टि की है। पॉलीथीन के प्रयोग को रोकने के लिए डीएम से अनुमति लेने के बाद चेकिंग अभियान चलाने की बात कही है।
पर्यावरण प्रदूषण को लेकर बढ़ रही चिंता, हाईकोर्ट और एनजीटी के सख्त रवैये के बाद प्रदेश सरकार ने 18 दिसंबर को सूबे में पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था।
22 दिसंबर को इसके संबंध में गजट जारी कर दिया। कानून का पालन कराने के लिए एक माह का समय दिया था। इसको देखते हुए पॉलीथीन पर प्रतिबंध का कानून 21 जनवरी यानि गुरुवार से लागू हो जाएगा।
बताते चलें कि पॉलीथीन की पन्नी में दी जाने वाली चाय की चुस्की बड़ा खतरा पैदा कर रही है। गर्म चाय पॉलीथीन के रसायनों के साथ घुलकर उसे शरीर में पहुंचा देती है। चाय की चुस्की के साथ शरीर में पहुंचने वाला रसायन कैंसर की बीमारी को पैदा करता है।
साथ ही सस्ते किस्म के खिलौनों का प्रयोग भी कैंसर पैदा करने का एक कारण है। इनके रसायन बच्चों के शरीर में पहुंच कर उन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं। गर्म खाना प्लास्टिक में मौजूद रसायन को खुद से मिला लेता है और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है।
इन्हीं दुष्परिणामों के कारण शासन ने इसका प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया है। जिला प्रदूषण अधिकारी डॉ. रामकरन ने बताया कि 21 जनवरी से पॉलीथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध का आदेश मिल चुका है।
पॉलीथिन पर बैन के कानून का हर हाल में पालन कराया जाएगा। जल्द ही डीएम से अनुमति लेने के बाद टीमें गठित कर फील्ड पर निरीक्षण कराकर प्रवर्तन की कार्रवाई कराई जाएगी।
पॉलीथीन की जगह क्या.......- वैसे पॉलीथीन का प्रयोग शहर के साथ-साथ पूरे जिले में धड़ल्ले से हो रहा है। मौजूदा समय में पॉलीथीन के बैग के बिना सामान लाने और ले जाने जाने के बारे में लोग सोच ही नहीं सकते हैं।
मार्केट से निकलने वाले हर व्यक्ति और महिला के हाथ में लिया गया सामान पॉलीथीन की पन्नी या बैग में आसानी से देखा जा सकता है। कुछ लोगों का कहना है कि पॉलीथीन के प्रतिबंधित होने के बाद से सामान किसमें लाएंगे, यह एक गंभीर समस्या नजर आ रही है।