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बाढ़ से 3500 हेक्टेयर फसलें नष्ट

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दूलीखेड़ा गांव में सैलाब से हुए दलदल से निकलता ग्रामीण। - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। नरौरा से छोड़े गए पानी के बाद जिले में आई बाढ़ से सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान पहुंचा है। अब तक चार तहसीलों से जिला प्रशासन को भेजी गई अनुमानित रिपोर्ट में 3500 हेक्टेअर में बोई गई फसलें नष्ट होने का अनुमान लगाया गया है। इसमें सदर में 1900, बांगरमऊ में 800, बीघापुर में 300 व सफीपुर में 400 हेक्टेअर में बोई गई फसलें नष्ट होने की आशंका जताई गई है। विस्तृत नुकसान के आंकलन को अभी राजस्वकर्मियों से सर्वे कराया जा रहा है।
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प्रशासन का दावा है कि अभी तक सदर तहसील में 190 किट वितरित की गई हैं। इसमें चना, आटा, दाल, चावल, तेल, साबुन, मंजन आदि सामान शामिल है। उधर, शनिवार को भी गंगा के जलस्तर में कमी आई। शाम 4 बजे जलस्तर 112.260 मीटर रिकार्ड किया गया। वहीं सदर तहसील के बाबू बंगला गांव में पहुंचे सदर विधायक पंकज गुप्ता व तहसीलदार अतुल कुमार ने 51 परिवारों को राहत किट वितरित की।
बीघापुर के कटरी क्षेत्र के गांवों में पानी कम होना शुरू हो गया है लेकिन समस्याएं बढ़ गई है। पानी कम होने से खेतों व आवागमन के मार्गों में कीचड़ हो गया है। इससे लोगों का आवागमन बाधित है। तहसील प्रशासन द्वारा अभी तक इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। गढ़ेवा निवासी किसान राजकिशोर सिंह व उमाशंकर लोधी ने बताया कि उनके धान की फसल खेतों में कटी रह गई थी जो बाढ़ के चलते गंगा की धारा में ही समा गई। दूलीखेड़ा निवासी किसान वीरेंद्र यादव ने बताया कि तहसील प्रशासन द्वारा कोई प्रबंध नहीं किया गया। चौड़ा का पुरवा निवासी आकाश यादव ने बताया कि बाढ़ के चलते खेतों में बोई गई सरसों की फसल को दोबारा बोना पड़ेगा। एसडीएम अजीत कुमार जायसवाल ने कहा कि ग्रामीणों व किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा।
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